संस्कार भारती महानगर एवं दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर पीजी कॉलेज की ओर से बृहस्पतिवार को बसंत पंचमी पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के युवा व वरिष्ठ कवियों ने अपनी रचनाएं सुना कर लोगों की वाहवाही बटोरी।
संस्थापक महामंत्री पद्मश्री डॉ. हरिभाऊ वाकड़कर के जन्मशताब्दी वर्ष के तहत कवि सम्मेलन में सबसे पहले डा. प्रियंका श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। महानगर अध्यक्ष डा. राजीव केतन ने सभी कवियों को स्वागत किया। इसके बाद संयोजक व वरिष्ठ कवि सुधा मोदी तरुण ने मां शारदे के चरणों में नमन करते हुए कवि सम्मेलन का आगाज किया।
उन्होंने सबसे पहले ढल जाऊं तेरे रंग में, वो रंग बना दे, तुझमें ही सिमट जाऊं वो अंग बना दे प्रस्तुत कर किया। इस कविता पर सभागार तालियों से गूंज उठा। डॉ. चारू शीला सिंह ने माता सरस्वती की आराधना करते हुए मां शारदे नमन मेरा स्वीकार कीजिए सुनाया।
माधुरी द्विवेदी ने लालच के चंद सिक्के बाजार में न हों तो धोखाधड़ी न होगी प्रस्तुत किया। प्रेमलता रसबिंदु ने भारतीय संस्कृति की सुंदर तस्वीर कविता के माध्यम से उकेरा भावना द्विवेदी ने प्रेम रस की कविता पढ़ी तो डॉ. सुदीप्ता बी. भूषण ने लड़की और दर्द शीर्षक से कविता सुना कर लोगों की तालियां बटोरी। सविता वर्मा, पूजा, साक्षी ने भी कविताएं पढ़ी।
इस अवसर पर संस्था की पूर्व अध्यक्ष रीता श्रीवास्तव, मिथिलेश तिवारी, रीना जायसवाल, डॉ. सुशीला चतुर्वेदी, आशा मिश्रा, अनीता श्रीवास्तव, प्रेमनाथ, जितेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. शरद मणि त्रिपाठी, हरि प्रसाद सिंह, विश्व मोहन तिवारी, डॉ. भारत भूषण, प्रवीर आर्या, अजित प्रताप सिंह, विवेक अस्थाना, देवेज्य, शिशिर आदि मौजूद रहे।