केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 9 से 12 तक की परीक्षाओं के प्रारूप में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। नौंवी और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब 40 फीसदी आब्जेक्टिव, केस और सोर्स स्टडी पर आधारित सवालों के जवाब देने होंगे।
ग्यारहवीं और बारहवीं में इस तरह के 30 फीसदी सवाल पूछे जाएंगे। ऐसा बदलाव पहली बार हुआ है। इसे शैक्षिक सत्र 2020-21 से लागू किया जाएगा। इसकी जानकारी शहर के 103 विद्यालयों को दी गई है। नई व्यवस्था से विद्यार्थियों की पढ़ाई आसान होगी। वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगे।
सीबीएसई ने कक्षा नौंवी से बारहवीं तक की पढ़ाई को ज्ञानवर्धक व रोजगार परक बनाने का फैसला किया है। इसी लिहाज से नौंवी, दसवीं में 20 फीसदी ऑब्जेक्टिव के साथ ही 20 प्रतिशत केस स्टडी और सोर्स स्टडी पर आधारित सवाल का प्रारूप बनाया गया। ग्यारहवीं और बारहवीं में 20 फीसदी सवाल आब्जेक्टिव पूछे जाएंगे।
10 फीसदी सवाल सोर्स स्टडी से पूछे जाने हैं। स्थानीय विद्यालय संचालकों के पास जो प्रारूप आया है, उसके मुताबिक विद्यार्थियों के अंदर तार्किक शक्ति के साथ प्रयोगात्मक ज्ञान को बढ़ाना है। मौजूदा पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को किस किस फार्मूला या वैज्ञानिक सिद्धांतों को पढ़ना है, इसके बारे में उन्हें जानकारी दी जाती है।
मगर इसका इस्तेमाल कहां, कैसे होगा, इससे विद्यार्थी अनभिज्ञ रहते हैं। नई व्यवस्था से विद्यार्थियों के अंदर सोचने और समझने की क्षमता विकसित होगी। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगे। ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं में आब्जेक्टिव सवाल ही पूछे जाते हैं। प्रारूप तो बदला है लेकिन परीक्षा के प्रश्नपत्रों के अंक और उसे हल करने का समय पुराना ही रहेगा। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
आर्मी पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य विशाल त्रिपाठी ने बताया कि बोर्ड के परीक्षा प्रारूप में बदलाव किया गया है। ऑब्जेक्टिव के साथ ही केस और सोर्स स्टडी से जुड़े सवालों की संख्या को बढ़ा दी गई है। जो बदलाव हुआ है, उसकी पढ़ाई शैक्षिक सत्र 2020-21 से कराई जाएगी।