निरीक्षण करते डीएम के. विजयेंद्र पांडियन।
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गोरखपुर में प्रस्तावित प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर कवायद तेज हो गई है। डिजाइन तैयार करने का काम शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को शासन से भेजे गए आर्किटेक्ट ने डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के साथ मौके का निरीक्षण कर जमीन को देखा। मुख्यमंत्री की मंशा है कि विश्वविद्यालय के भवन की डिजाइन, भारतीय वास्तु शास्त्र के अनुसार हो ताकि विश्वविद्यालय की इमारत में भारतीयता की पूरी झलक दिखे। मार्च के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
बृहस्पतिवार को आर्किटेक्ट और डीएम ने दोपहर ढाई बजे मलमलिया गांव पहुंच, जमीन देखी। इस दौरान कुछ किसानों ने भी उनसे मुलाकात करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के लिए जो जमीन चिह्नित की गई है, उसमें से जमीन के कई हिस्सों पर वे वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। मालगुजारी भी जमा करते हैं। शासन उन्हें क्षतिपूर्ति दे। इस संबंध में उन्होंने मंदिर में मुख्यमंत्री से भी फरियाद की थी। वहीं एसडीएम चौरीचौरा का कहना जमीन सीलिंग की है। किसान अपने दस्तावेज दे, जांच की जाएगी। सरकारी दस्तावेजों में जमीन सीलिंग के नाम दर्ज है।