विनोद राय को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाकर भूमिहार बिरादरी में दिया सियासी संदेश
- पूर्वांचल में करीब तीन फीसदी है भूमिहार बिरादरी का आबादी, पांच से सात सीटों पर है सीधा दखल
गोरखपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आजमगढ़ के विनोद राय को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल की कई सीटों पर जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की है। विनोद राय भूमिहार बिरादरी से आते हैं और पूर्वांचल में करीब तीन फीसदी भूमिहार हैं, जो विधानसभा चुनाव की सियासी गणित बनाने-बिगाड़ने काफी अहम रोल निभाते हैं। पांच से सात विधानसभा सीटों पर इस बिरादरी का सीधा दखल है। इसके अलावा कई और सीटें हैं जहां इस बिरादरी के लोग चुनाव में ट्रंप कार्ड साबित होते हैं।
विनोद राय को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी इस वोट बैंक को अपने साथ जोड़े रखने का मजबूत संदेश दे रही है। इसके पहले सहजानंद राय को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया था। दोनों नेता आजमगढ़ के हैं। आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, मेंहदावल (संत कबीर नगर) में भूमिहार बिरादरी की संख्या ज्यादा है। ऐसे में संगठन ने इस बिरादरी की प्रभावी भूमिका को बनाए रखने का फैसला लिया।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के सहायक आचार्य डॉ मनीष पांडेय कहते हैं, किसी भी जाति की जहां बहुलता होती है वहां समाज में जातीय समन्वय ज्यादा होता है। समाज के बीच से किसी को संगठन की कमान सौंपी जाती है तो उसका सामाजिक प्रभाव भी पड़ता है। मुझे लगता है कि भाजपा ने भूमिहार बिरादरी को आगे करके जातीय समन्वय बैठाने की कोशिश की है। अब हार जीत का अंतर बहुत कम मतों से हो रहा है तो इस फार्मूले से जरूर पार्टी को लाभ मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति से पूर्वांचल में बीजेपी का जातीय और सांगठनिक समीकरण और अधिक मजबूत होगा। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ महेंद्र सिंह कहते हैं, भाजपा ने बड़ी सूझबूझ के साथ क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भूमिहार बिरादरी से आने वाले विनोद राय को दी है। पूर्वांचल में भूमिहार बिरादरी अपने अलग रुख और राजनीतिक हैसियत के कारण विशेष महत्व रखती है। शैक्षणिक, बौद्धिक और आर्थिक तौर पर मजबूत माने जाते हैं और सामाजिक रूप से लोगों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में विनोद राय को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाए जाने से बिरादरी के बीच पकड़ बनाए रखने की रणनीति मानी जा रही है।