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Gorakhpur News: खेती की जमीन बेचकर धंधेबाजों ने करोड़ों कमाए, फंस गए खरीदार

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- एमएमएमयूटी से एम्स के बीच सिंघड़िया इलाके में बने हैं तीन हजार से अधिक मकान
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- जीडीए की महायोजना 2031 में है यह हरित क्षेत्र, लोगों को सता रहा घर टूटने का डर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। खेती की जमीन बेचकर धंधेबाजों ने करोड़ों रुपये कमाए, लेकिन खरीदार अब फंस गए हैं। उन्हें सूझ नहीं रहा कि वे अब क्या करें। उन्हें अपने मकान को लेकर चिंता सताने लगी है।
करीब 30 वर्ष पहले गांव छोड़कर सिंघड़िया में 17 डिसमिल जमीन खरीदकर घर बनाने वाले दीनानाथ ने सोचा था कि बैंक मैनेजर पद से रिटायरमेंट के बाद बुढ़ापा बड़े सुकून से गुजरेगा, लेकिन उन्होंने सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि जिस घर को बनाने में पाई-पाई लगा दी, वह अवैध निर्माण की श्रेणी में आ जाएगा।
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दरअसल, दीनानाथ जैसे ही सैकड़ों अन्य लोगों ने नब्बे के दशक में गोरखपुर शहर का विस्तार देखकर सिंघड़िया इलाके में जमीन खरीद ली। तब, प्लाॅटिंग का चलन नहीं था। धंधेबाज सीधे काश्तकार से बात कराकर जमीन का बैनामा करा देते थे।
लोगों को पता था कि यह नगर निगम का हिस्सा है और जमीनें आवासीय हैं। जब घर बनने शुरू हुए तो यहां सड़क, बिजली, सीवर लाइन का भी विकास किया गया। अब जब पूरा इलाका विकसित हो गया, तो जीडीए ने इसे महायोजना 2031 में कृषि भूमि मानते हुए ग्रीन बेल्ट घोषित कर दिया।
देवरिया रोड पर एम्स की पूर्वी बाउंड्री से लेकर एमएमएमयूटी की पश्चिमी बाउंड्री के बीच रेलवे लाइन तक पूरा इलाका मदन मोहन मालवीय नगर (सिंघड़िया) मोहल्ला है। तीन दशक में यहां साईं धाम काॅलोनी, प्रज्ञापुरम, वसुंधरानगर, आदर्शनगर समेत कई काॅलोनियां बस गईं। इन काॅलोनियों में अधिकांश लोग सेना या किसी अन्य नौकरी से रिटायर्ड हैं, जिन्होंने सारी जमा पूंजी लगाकर जमीन खरीदी और लोन लेकर घर बनवाए हैं।
नंदानगर क्राॅसिंग से पहले एम्स की बाउंड्री और रेलवे लाइन के किनारे की पक्की सड़क पर आगे चलकर दीनानाथ का घर है। शनिवार दोपहर दीनानाथ अपने घर के सामने चिंता मगन मुद्रा में खड़े थे। इन्होंने अपने घर के तीन कमरे किराए पर दे रखे हैं।
चर्चा छिड़ते ही कहते हैं कि आप ही बताइए कि जब हम हाऊस टैक्स देते हैं, वाटर टैक्स देते हैं, सीवर लाइन पड़ी है तो फिर घर अवैध कैसे हो गए? इसी काॅलोनी की अगली गली में फौजी कामेश्वर सिंह भी रहते हैं। मोहल्ले की वैधता पर चर्चा हुई तो सामने की ऊंची इमारतों को दिखाते हुए कहते हैं कि बताइए, ये एक दिन में तो बने नहीं होंगे। कई मकान 20-25 साल पुराने हैं।
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बन रहे घरों को दिखाकर बेची गईं जमीनें
सिंघड़िया निवासी एमके दूबे बताते हैं कि 1990 से सन 2000 के बीच इस इलाके में जमीन के भाव तेजी से बढ़ रहे थे। शहर के सबसे नजदीक होने के अलावा देवरिया-कुशीनगर के मुख्य मार्ग पर स्थित इस इलाके में सबसे अधिक लोग देवरिया-कुशीनगर और बिहार सीवान, गोपालगंज, मैरवा, बगहा आदि के हैं। उस वक्त यहां जमीन का भाव आठ से 10 हजार रुपये कट्ठा था। इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री का काम करने वाले कई लोग सक्रिय थे। वे काश्तकारों और खरीदार के बीच मोलभाव कराते थे। नगर निगम और जीडीए में उनकी मजबूत पकड़ थी। वे लोग न केवल जमीन की रजिस्ट्री कराते थे, बल्कि उस इलाके में बिना नक्शा पास कराए ही घर भी बनवाने का प्रबंध करते थे। बन रहे घर को दिखाकर ही दूसरे खरीदार को इस बात के लिए आश्वस्त किया जाता था कि यहां जमीन खरीदने में किसी प्रकार का रिस्क नहीं है। नगर निगम या जीडीए के अफसर निर्माण कार्य पर कोई आपत्ति नहीं करते थे। साथ ही टैक्स जमा करने से लेकर पेयजल, सीवर लाइन और अब तो गैस पाइप लाइन बिछवाने में भी उन्हीं अफसरों ने मदद की, लेकिन क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट में शामिल किए रखा।

जीडीए वीसी के आश्वासन पर मना था उत्सव
करीब दो साल पहले ग्रीन बेल्ट में शामिल होने का यह मामला चर्चा में आया। मोहल्ले के लोग जीडीए वीसी से मिलने गए थे। तत्कालीन जीडीए वीसी ने आश्वासन भी दिया था कि इस इलाके को विनियमितिकरण में शामिल किया जाएगा। उनके आश्वासन पर मोहल्ले में जश्न मनाया गया। लोग खुश थे कि अब उनके मकान नहीं टूटेंगे। लेकिन, न जाने ऐसा कौन सा खेल हो गया कि सिंघड़िया के अगल-बगल के अन्य मोहल्ले विनियमितिकरण में शामिल किए गए, लेकिन इसे छोड़ दिया गया।

जान दे देंगे, घर नहीं टूटने देंगे
दोपहर करीब तीन बजे मोहल्ले के एक घर में महिलाओं का समूह चर्चा में मशगूल था। इनके बीच भी ग्रीन बेल्ट होने पर घर टूटने को लेकर चिंता था। गिरजा तिवारी ने कहा कि इसी मोहल्ले में यज्ञ हुआ था, जिसमें योगी आदित्यनाथ आए थे। उनके निधि से ही यह आरसीसी सड़क बनी। तब मोहल्ला अवैध नहीं था, अब अवैध हो गया। इस पर सुनीता श्रीवास्तव ने कहा यह सब अफसरों की ही मनमानी है। सीमा और मनोरमा पांडेय का कहना था कि इतने घर बने हैं, बिजली के पोल लगे हैं, लेकिन अफसरों को यही नहीं दिखता। गौतम शर्मा और रागिनी पाठक का कहना था कि हमने जमीन की रजिस्ट्री कराई तो प्रशासन को उसी वक्त बताना चाहिए था कि यह ग्रीन बेल्ट है और यहां जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। प्रशासन ने टैक्स लेते समय एक बार भी नहीं सोचा और अब ग्रीन बेल्ट खोज रहे हैं। बुजुर्ग फूलपति श्रीवास्तव और चंद्रावती देवी का कहना था कि हम यहां करीब 35 वर्षों से परिवार के साथ रहते हैं। हम लोगों के जिंदा रहते मोहल्ले का एक भी घर नहीं टूटेगा। अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो सब लोग एक साथ मुख्यमंत्री से मिलने चलेंगे।
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नगर क्षेत्र में जहां भी नागरिक निवास करते हैं, वहां सुविधाएं मुहैया कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। सिंघड़िया इलाके में पहले से ही काफी घर बने हुए हैं। उनका नक्श स्वीकृत है या नहीं, यह जीडीए का विषय है। नगर निगम ने नागरिकों की सुविधा के लिए सड़क, नाली, सीवर लाइन का विकास कराया है।
- गौरव सिंह सोगरवाल, नगर आयुक्त

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