कुट्टू का आटा ग्लूटेन-मुक्त आटा है, जो फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से भरपूर होता है। नवरात्र या किसी व्रत में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। दरअसल, शहर के धंधेबाजों ने कुट्टू का स्टॉक मंगवाकर पहले ही रख लिया था। नवरात्र से पहले इसे पीसकर छोटे पैकेट में भरकर दुकानों तक पहुंचा दिया।
नवरात्र में यह आपको सावधान करने वाली खबर है। ऐसा इसलिए कि व्रत में इस्तेमाल की जाने वाली खाद्य सामग्रियों पर भी धंधेबाजों की तिरछी नजर है। कुट्टू का आटा हो या तिन्नी का चावल, कुछ भी साफ-सुथरा बचा नहीं है। कुट्टू के आटे में खराब सिंघाड़े के आटे को मिलाकर बेचा जा रहा है तो तिन्नी के चावल की जगह आम चावल को केमिकल से रंग कर धंधेबाज बेच रहे हैं।
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कुट्टू का आटा ग्लूटेन-मुक्त आटा है, जो फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से भरपूर होता है। नवरात्र या किसी व्रत में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है। दरअसल, शहर के धंधेबाजों ने कुट्टू का स्टॉक मंगवाकर पहले ही रख लिया था। नवरात्र से पहले इसे पीसकर छोटे पैकेट में भरकर दुकानों तक पहुंचा दिया।
खास बात यह है कि इन पैकेट पर निर्माता का पूरा पता, एफएसएसएआई लाइसेंस/पंजीकरण संख्या, पैकिंग डेट और एक्सपायरी डेट का जिक्र ही नहीं है। फिर भी लोग इन चीजों को नजरअंदाज कर खरीद रहे हैं, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
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मिलावट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
व्यापारियों के अनुसार, नवरात्र के समय शहर में कुट्टू के आटे की खपत करीब पांच टन है। बाजार में इसका कोई फिक्स रेट नहीं है। 70 से लेकर 250 रुपये तक यह आटा बिक रहा है। किराना व्यापारी सौरभ सिंह ने बताया कि कुट्टू, चावल की एक प्रजाति है, जो ठंडे और पहाड़ी इलाकों में होता है।
इसमें प्रोटीन हाई मात्रा में होती है। इसे स्टोर करके रखना या इसमें मिलावट करना खतरनाक होता है, क्योंकि स्टोर करने से नमी हो सकती है और फंगस लग सकते हैं।
बाजार में कुट्टू और सिंघाड़े का आटा ऐसे पैकेट में मिल रहा है, जिसपर निर्माता का नाम और एक्सपायरी डेट नहीं है। इसमें मिलावट की आशंका होती है। ग्राहक सस्ते के चक्कर में इसे खरीदते हैं। उन्हें निर्माता का पूरा पता, एफएसएसएआई लाइसेंस/पंजीकरण संख्या, पैकिंग डेट और एक्सपायरी डेट देखकर ही सामान खरीदने के लिए जागरूक किया जाता है।
बताया जा रहा है कि धंधेबाज कानपुर से माल मंगवा रहे हैं और गोरखपुर में पीसकर पैकेट में बेच रहे हैं।
सिंघाड़े को पीसकर मिला रहे
सूत्रों ने बताया कि बहुत सारे दुकानदार खराब सिंघाड़े को पहले अच्छे से सुखाते हैं। इसके बाद इसे पीसकर कुट्टू के आटे में मिला देते हैं। कुट्टू को कोल्ड स्टोरेज में स्टोर किया रहता है, इसकी वजह से उसमें फंगस लग जाता है।
इसीलिए दोनों को मिलाकर पीस देते हैं, जिससे फंगस समझ में नहीं आता। बाजार में सिंघाड़ा 180 रुपये किलो बिक रहा है, लेकिन उसका आटा 70 रुपये में ही मिल जा रहा है।
फंगस से हो जाता है खतरनाक
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुट्टू के आटे को करीब छह महीने तक ही स्टोर करके रखा जाता है। इससे ज्यादा समय से रखा आटा खाना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए कभी भी पुराना कट्टू का आटा नहीं खाना चाहिए, वरना सेहत बिगड़ सकती है। इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि कु़ट्टू को घर में पीसकर ही आटा बनाना चाहिए।
इस तरह करें कुट्टू के आटे की पहचान
- कु़ट्टू के आटे को जब भी खरीदें तो पहले उसका रंग देख लें। खराब कट्टू के आटे का रंग बदल जाता है।
- सूंघने पर अगर आटे से महक आ रही है तो न खरीदें।
- आटा अगर गूंथते समय बिखर रहा हो या ज्यादा चिकना हो रहा है तो समझ जाएं कि इसमें अरारोट मिलाया गया है।
खराब कुट्टू का आटा खाने से नुकसान
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि फाइबर ज्यादा होने की वजह से कुछ लोगों को इस आटे को खाने के बाद पेट दर्द, अपच, सूजन या गैस बन सकती है। खराब आटा खाने के बाद स्किन पर रिएक्शन, पेट में दिक्कत और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
इसमें अगर पहले से ही नमक या सोडियम वाली कोई चीज मिलाई गई है तो इसे खाने से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। कुट्टू का आटा कम ही खाना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल गिरता है।
तिन्नी के चावल में रंग
बाजार में तिन्नी का चावल भी मिलावटी बिक रहा है। किराना दुकानदार सुरेश गुप्ता ने बताया कि बाजार में बहुत सारे लोग आम चावल में रंग मिलाकर उसे तिन्नी का चावल बताकर बेच रहे हैं। लेकिन इसे पहचान करने का सबसे आसान तरीका है कि चावल में लकीर को देखें। यदि उसमें लकीर है तो उसमें मिलावट नहीं है।