गोरखपुर बेतियाहाता के प्रिंस तिवारी ने तीन वर्ष पहले शास्त्री चौक बीएसएनएल दफ्तर से 4 जी सिम खरीदा था। सिम लेते वक्त उन्हें बताया गया कि अब 4जी नेटवर्क चलेगा। नए सिम के लिए उन्होंने 100 रुपये का शुल्क भी जमा किया। लेकिन, प्रिंस के सिम पर 3जी नेटवर्क ही काम कर रहा है। वे कहते हैं बीएसएनएल के झांसे में आकर अब ठगा महसूस कर रहे है।
शहर में बीएसएनल का 4जी नेटवर्क नहीं है। ग्राहकों ने बताया कि हद तो यह है कि स्मार्टफोन में बीएसएनएल का 3जी नेटवर्क भी नहीं चलता। कुछ देर तक 3जी नेटवर्क दिखता है। उसके बाद मोबाइल 2जी पर आ जाता है। ग्राहकों ने बताया कि तीन वर्ष पहले ही बीएसएनएल की तरफ से 4जी सिम बेचकर लोगों को गुमराह किया गया था। इसके अलावा, पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने जिले का पांच गांवों में 4जी सेवा के विस्तार की योजना बनाई थी।
गांवों के नाम भी भेज दिए गए थे। योजना थी कि इन गांवों में ट्रायल के बाद अक्टूबर 2022 (दीपावली तक) 4जी सेवा का विस्तार कर दिया जाएगा। लेकिन, यहां भी योजना कागजों तक सिमट कर रह गई। जंगल रामगढ़ के अतुल ने बताया कि एक वर्ष पहले सूचना मिली कि गांवों में 4जी नेटवर्क हो जाएगा। अभी बीएसएनएल पर अक्सर 3जी नेटवर्क ही मिलता है। जबकि, बिजली जाने के बाद 2जी नेटवर्क हो जाता।
गोरखपुर-महाराजगंज जिलों में ग्राहक
गोरखपुर-महाराजगंज जिलों में बीएसएनएल के तीन लाख ग्राहक पहले थे। पिछले तीन साल में 1.25 लाख ग्राहक 4जी सिम वाले भी जुड़े हैं। कुल संख्या 4.25 लाख हो गई है। जबकि छह हजार पोस्टपेड उपभोक्ता हैं, ये भी 3जी नेटवर्क वाले ही हैं।
कुल बीटीएस की संख्या
गोरखपुर-महाराजगंज जिले में अभी टू और 3जी के 478 बेस ट्रांसमिशन स्टेशन (बीटीएस) हैं। 4जी नेटवर्क शुरू होने के बाद इन्हीं बीटीएस की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसका काम भी सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया।
इन गांवों में किया जाएगा 4जी का ट्रायल
रजही उर्फ रामगढ़, चिलबिलवा, आमबाग, जंगल रामगढ़ उर्फ खजनी, जंगल तिनकोनिया नंबर
बीएसएनएल प्रधान महाप्रबंधक विद्यानंद ने कहा कि 4जी सेवा शुरू होनी है। अभी 3जी ही चल रही। जिन गांवों में 4जी नेटवर्क होगा, वहां अभी प्रस्ताव बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार अपने स्तर से इस काम को पूरा करेगी। लखनऊ से नए टॉवर, उसके लिए जमीन, बिजली कनेक्शन और बैटरी के साथ नए बेस ट्रांसमिशन स्टेशनों (बीटीएस) का काम होना है। ये काम भी लखनऊ की टीम करेगी।