- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बन रहा लेवल-1 का 100 बेड वाला ट्रामा सेंटर
- तीन मंजिला ट्रामा सेंटर के निर्माण पर खर्च होंगे 38.02 करोड़ रुपये
गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंभीर दुर्घटनाओं और अन्य आकस्मिक स्थितियों में जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं और सुदृढ़ होंगी। इसका माध्यम बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लेवल-2 से परिवर्तित कर लेवल-1 के रूप में स्थापित किया जा रहा ट्रामा सेंटर बनेगा। इस ट्रामा सेंटर की क्षमता 100 बेड की होगी। यहां चार ऑपरेशन थिएटर के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
सरकार की ओर से लेवल-1 ट्रामा सेंटर का निर्माण 38.02 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम अब तक 36 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर चुकी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 6,510 वर्गमीटर क्षेत्रफल में निर्माणाधीन लेवल-1 ट्रामा सेंटर ग्राउंड फ्लोर समेत तीन मंजिला होगा। इसमें अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार के गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था होगी। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों, सिर में चोट लगने से कोमा में गए मरीजों या गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इलाज के लिए किसी अन्य स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि यह ट्रामा सेंटर चार मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर समेत अत्याधुनिक जांच और चिकित्सा सुविधाओं से लैस होगा। ट्रामा के मरीजों के लिए यहां एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी वार्ड, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, जांच कक्ष और अन्य सहायक सेवाओं की व्यवस्था की जाएगी। इससे गंभीर मरीजों को इलाज के लिए एक भवन से दूसरे भवन में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी और अत्यंत गंभीर मरीजों का गोल्डन ऑवर में तत्काल आपात उपचार बेहतर तरीके से संभव हो सकेगा। लेवल-1 ट्रामा सेंटर के संचालित होने के बाद गंभीर मरीजों को अन्य बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
50 बेड का ट्रामा सेंटर है संचालित
वर्तमान में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 50 बेड का ट्रामा सेंटर संचालित है जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर सीमावर्ती बिहार तक के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। लेवल-1 ट्रामा सेंटर शुरू होने से इलाज की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। इससे मौजूदा व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।