स्वास्थ्य विभाग अब तक कोरोना की तैयारियों को लेकर जो दावे करता रहा है, वह पूरी तरह से फेल है। अलक्षणिक मरीजों को तो किसी तरह भर्ती कर दिया जा रहा है, लेकिन गंभीर मरीजों के इलाज की कोई खास व्यवस्था नहीं है। हालात ऐसे हैं कि गंभीर मरीजों और उनके परिजन खुद ही इलाज की व्यवस्था करनी है। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो मरीज की जान पर आफत आनी तय है। मेडिकल कॉलेज के अलावा शहर में लेवल टू व थ्री के अस्पताल नहीं है, जहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जा सके। सभी मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। कॉलेज प्रशासन उन्हें एडमिट करने की स्थिति में नहीं है।
कमिश्नर, डीएम और सीएमओ से कर चुके हैं अपील
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि कमिश्नर, एडी हेल्थ, डीएम और सीएमओ को इस बात की जानकारी दी जा चुकी है कि मेडिकल कॉलेज में जगह नहीं है। ऐसे में मरीजों को रेफर करने से पहले बीआरडी की स्थिति जरूर जान लें। इसके बाद भी लोग बीआरडी में सीधे मरीज रेफर कर दे रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि कोरोना वार्ड पूरी तरह से फुल है। एक भी बेड खाली नहीं है। सीएमओ व जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि अब मरीजों को यहां न भेजें।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर 90 बेड के टीबी अस्पताल में लेवल टू की व्यवस्था की गई है। एक-दो दिन में वहां मरीजों को भर्ती किया जाएगा। रेलवे अस्पताल को भी लेवल-टू बनाने का प्रयास चल रहा है।
लेवल वन अस्पताल में उन मरीजों को भर्ती किया जाता है, जो पॉजिटिव हैं लेकिन उनमें कोई लक्षण नहीं होता है। लक्षण आने पर उन्हें लेवल टू और स्थिति गंभीर होने पर लेवल थ्री अस्पताल में शिफ्ट किया जाता है। लेवल थ्री अस्पताल आधुनिक सुविधा-संसाधनों से लैस होते हैं।