सहजनवां इलाके में उद्योगों से निकलती काली राख और धुआं लोगों का दम घोंट रहा
सीएचसी में दवा लेने रोजाना पहुंच रहे 10 से 15 मरीज, बढ़ती जा रही है परेशानी
लोग बोले- हवा से लेकर पानी सब प्रदूषित, प्रशासन को कोई चिंता नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सहजनवां। इलाके की फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं और काली राख से हवा में आक्सीजन से ज्यादा जहर घुल गया है। इससे लोगों दम घुट रहा है। उनके स्वास्थ्य के साथ ही रहन-सहन भी प्रभावित हुआ है। प्रदूषण विभाग के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि सहजनवां में वायु की गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में हैं। जिस पीएम-10 की मात्रा 50 से 100 के बीच होनी चाहिए वह 317.45 रिकॉर्ड की गई है। हालात यह है कि यहां के लोग दमा के साथ ही चर्म रोगी बन रहे हैं। सहजनवां सीएचसी में रोजाना 10 से 15 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें लाल चकत्ते, खुजली, दाने तथा आखों में जलन की समस्या है।
इस परेशानी का हल ढूंढने की जगह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी सिर्फ पत्राचार कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ले रहे हैं। यहां के लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि वे अब क्या करें और किसकी चौखट पर फरियाद लेकर जाएं।
बृहस्पतिवार की दोपहर करीब एक बजे सहजनवां कस्बे के वार्ड संख्या-10 निवासी कैप्टन ओम प्रकाश मिश्रा अपने दरवाजे पर बैठे हुए थे। उनसे जब हालचाल पूछा गया, तो पीड़ा सामने आ गई। बोले-यहां जब उद्योग लगे, तो काफी खुशी मिली थी। लेकिन, अब फैक्टरियों से निकली राख, धुएं और गंदगी से लोग बीमार पड़ने लगे हैं। साफ-सफाई करने की बात छोड़िए, अभी तो एलर्जी ने परेशान कर रखा है। कुछ दूर बढ़ने पर अधिवक्ता अरुण सिंह मिल गए। बोले-हवा से लेकर पानी सब प्रदूषित हो गया है। प्रशासन को कोई चिंता ही नहीं है।
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इंसान ही नहीं बंदरों को भी एलर्जी
सहजनवां के ही राहुल, अंगद दुबे, वीरेंद्र सिंह ने बताया कि काली राख का असर लोगों के अलावा बंदरों पर भी पड़ रहा है। बंदरों के बदन से बाल गायब होने लगे हैं। उनकी त्वचा भी खराब हो रही। अब तो उनकी संख्या भी कम हो गई है। शायद परेशान होकर कहीं और चले गए।
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अनाज, सब्जियों तथा पीने के पानी में काली राख के कण
लुचई गांव के देवीशरण सिंह और बिसई गुप्त और सहबाजगंज के परमहंस, रामरक्षा, रामवृक्ष,राघव ने बताया कि राख और धुएं का असर आंखों पर पड़ रहा है। आंखें लाल होने और पानी गिरने जैसी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। वार्ड संख्या 10 के ही रहने वाले वीरेंद्र दुबे ने बताया कि बड़ों से लेकर बच्चों तक सभी परेशान हैं। घर में रहने, खाने की दुश्वारी के साथ अब बीमारी से जूझना पड़ रहा है। इसका असर खाने पीने की चीजों पर भी नजर आ रहा है। अनाज, सब्जियों तथा पीने के पानी में काली राख के कण मिल रहे हैं।
बढ़ते जा रहे त्वचा के रोगी
सहजनवां, सीएचसी में बृहस्पतिवार को करीब 15 मरीज एलर्जी के पहुंचे थे। सभी को खुजली, चकत्ते, लाल दाने आदि की समस्या थी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. व्यास कुशवाहा ने बताया कि त्वचा के रोगी बढ़ते जा रहे हैं। औसतन 10 से 15 मरीज आने लगे हैं। चार माह पूर्व इनकी संख्या पांच से छह होती थी।
बेहद खतरनाक है गीडा में वायु प्रदूषण का स्तर
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गीडा में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। यहां का पीएम-10 में 317.45 दर्ज किया गया है। विशेषज्ञाें के मुताबिक यह बेहद की खतरनाक स्थिति है। इससे सांस सहित अन्य बीमारियों के ग्रसित होने का खतरा रहता है। पीएम 10 का मतलब होता है कि हवा में मौजूद कण जो 10 माइक्रो सेंटीमीटर से भी छोटे हैं। पीएम 10 का स्तर 100 से ऊपर पहुंचता है, तो ये खराब श्रेणी में आ जाता है। हवा में धूल, मिट्टी के कण ज्यादा होते हैं, जो आसानी से सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाते हैं।
लोग बोले
यहां रहना मुश्किल होता जा रहा
अब तो यहां रहना मुश्किल होता जा रहा है। अभी इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आगे चलकर काफी दिक्कत होगी। इस संबंध में मैंने व्यक्तिगत रूप से डीएम से मिलकर गुहार लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। : कैप्टन ओम प्रकाश मिश्रा, सहजनवां
इलाके में घर बनवाने का पछतावा
यहां घर बनवाने का अब काफी पछतावा हो रहा है। प्रदूषण के मुद्दे पर अधिकारी चुप हैं। कई बार मामले को उठाने का कोई फायदा नहीं मिला। शिकायत पर संबंधित विभागों के अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं, कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। : वीरेंद्र दुबे, सहजनवां
फैक्टरी वालों के खिलाफ नहीं होगी कार्रवाई
घर से लेकर बाहर तक काली राख नजर आती है। यह राख फेफड़े में जा रही है। इससे लोगों को सांस फूलने की बीमारी हो रही। अब यहां रहने वाले अपना घर छोड़कर कहीं जा नहीं सकते। फैक्टरी वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई तो होगी नहीं। : लालमन, सहजनवां
हर जगह राख बचना मुश्किल
खाना बनाते समय बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ती है। कपड़े सुखाने से लेकर अन्य तरह की समस्या आ रही है। हर जगह राख बिखरी रहती है। इससे बचना काफी मुश्किल होता जा रहा है। : इसरावती, सहजनवां
कोट
प्रदूषण के संंबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। वहां से संबंधित फैक्टरियों को नोटिस जारी किया जाएगा। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को कारण बताओ नोटिस देने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। : पंकज यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गोरखपुर