पंचायती राज अधिनियम लागू होने के पहली बार वर्ष 1995 के चुनाव में भाजपा ने भाग्य आजमाया। दमयंती विश्वकर्मा चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं। कांग्रेस की द्रौपदी मल्ल चुनाव जीत गईं। अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद धनंजय राव को अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान 1999 में हुए चुनाव में शकुंतला यादव अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में कृष्णा जायसवाल चुनाव अध्यक्ष बनीं।
अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद कुछ दिनों के लिए राणाप्रताप सिंह अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए। वर्ष 2005 के चुनाव में आनंद कुमार सिंह चुनाव जीते। वर्ष 2010 के चुनाव में तत्कालीन बसपा एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट की पत्नी बालेश्वरी देवी अध्यक्ष चुनी गईं और कार्यकाल पूरा कीं। वर्ष 2015 के चुनाव में सपा के रामप्रवेश यादव अध्यक्ष बने।
क्या कहते हैं जानकार
तीन बार भाजपा अध्यक्ष रहे विजय कुमार दुबे का कहना है कि आजादी के बाद भाजपा मजबूती से कई बार चुनाव लड़ी लेकिन सफलता हासिल नहीं हो सकी। वर्ष 1995 में दमयंती विश्वकर्मा और कृष्णा जायसवाल को बराबर मत प्राप्त हुए थे। लेकिन द्वितीय वरीयता के वोट से कृष्णा जायसवाल चुनाव जीत गईं। वर्ष 2000 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में कृष्णा जायसवाल चुनाव लड़ीं लेकिन तीन मतों से हार गईं।
इस बार मजबूती से पार्टी चुनाव लड़ रही है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष धनंजय राव का कहना है कि कांग्रेस, सपा, बसपा का अध्यक्ष पद पर कब्जा रहा है। लेकिन, भाजपा को सफलता नहीं मिल सकी है। उधर, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष बाबूलाल यादव का कहना है कि सपा कई बार अध्यक्ष का चुनाव जीती है। इस बार भी सपा ही चुनाव जीतेगी।