बलिदान दिवस पर एमएमएमयूटी में आयोजित संगोष्ठी में बोले भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और गुरुकृपा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान दिवस (शहीदी दिवस) के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इसमें शहीद-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह ने भगत सिंह के व्यक्तिगत पत्रों, जेल नोटबुक और उनके अंतिम संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि शहीदों का कल्पित भारत एक ऐसा राष्ट्र था, जहां जातिवाद, धार्मिक कट्टरता, आर्थिक असमानता और सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं था। उनकी मौजूदगी ने पूरे सभागार में जोश और उत्साह की लहर दौड़ा दी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन और कार्यों में उतारें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
शहीदों के सपनों का भारत-युवाओं से संवाद, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहीद-ए-आजम सोसाइटी के अध्यक्ष प्रदीप देशवाल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को शहीद भगत सिंह के वैचारिक संघर्ष, उनकी क्रांतिकारी विचारधारा, सामाजिक न्याय और साम्यवादी सिद्धांतों से विस्तार से परिचित कराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगत सिंह केवल एक शहीद नहीं थे, बल्कि एक युगदृष्टा विचारक थे जिनके सपने आज भी प्रासंगिक हैं।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास ही सच्ची शिक्षा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने शोध, नवाचार और तकनीकी कौशल को देश की प्रगति, आत्मनिर्भर भारत और शहीदों के सपनों से जोड़ें।
संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने अतिथियों से देश की वर्तमान चुनौतियों जैसे-बेरोजगारी, सामाजिक असमानता, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति की भूमिका पर प्रश्न पूछे। इस दौरान छात्र क्रियाकलाप परिषद के अध्यक्ष प्रो. बीके पांडेय, डॉ. अवधेश कुमार सहित सभी शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।