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Gorakhpur News: बंगाली समिति ने शुरू की शहर में दुर्गा पूजा की परंपरा

Tue, 17 Oct 2023 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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शहर में 1896 में हुई थी दुर्गा पूजा की शुरुआत
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70 वर्षों से दुर्गाबाड़ी में स्थापित हो रही है दुर्गा प्रतिमा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। पश्चिम बंगाल के बाद अगर कहीं सबसे अधिक दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना होती है वह गोरखपुर शहर है। यहां दुर्गा पूजा की शुरुआत 1896 में हुई जो निरंतर जारी है। इस दुर्गा पूजा को शुरू करने का श्रेय बंगाली समिति को जाता है। समिति की ओर से यहां शुरू की गई व्यवस्थित दुर्गा पूजा ने ही आज भव्य रूप ले लिया है।
इतिहास में जाएं तो शहर में बंगाल के रहने वाले डॉ. योगेश्वर राय, जो जिला अस्पताल में सिविल सर्जन थे। उन्होंने 1896 में अस्पताल परिसर में दुर्गा पूजा की शुरुआत की। यहां 1903 तक दुर्गा पूजा होती रही। 1903 में प्लेग महामारी फैली, जिसके कारण दुर्गा पूजा बंद करनी पड़ी। यह 1906 तक बंद रही। 1907 से 1909 तक जुबली कॉलेज के प्रधानाचार्य राय साहब अघोर नाथ चटर्जी व डॉ. राधा विनोद राय ने जुबली कॉलेज में दुर्गा पूजा की शुरुआत की।
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1910 में आर्य नाट्य मंच का गठन हुआ। इसी समय दुर्गा पूजा अलहदादपुर में स्थानांतरित हो गई। दुर्गा पूजा को गति और व्यवस्थित रूप मिले, इसके लिए 1928 में आर्य नाट्य मंच और सुहृदय समिति का विलय कर बंगाली समिति का गठन हुआ, जिसने दुर्गा पूजा की जिम्मेदारी संभाल ली। इसी समय दुर्गा पूजा स्थानांतरित होकर भगवती प्रसाद रईस के हाता में आ गई। कुछ वर्षों के बाद यह पूजा चरणलाल चौराहे पर आयोजित होने लगी।
1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय सरकार ने चरणलाल चौराहा स्थित वह भवन अधिग्रहीत कर लिया तो समिति ने दुर्गा पूजा को दीवान बाजार में स्थानांतरित कर दिया। 1953 में बाबू महादेव प्रसाद रईस ने अपने पिता भगवती प्रसाद की स्मृति में समिति को एक भूखंड प्रदान किया जहां आज दुर्गाबाड़ी है। तभी से यहां समिति की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा। आज शहर में दुर्गाबाड़ी में स्थापित दुर्गा प्रतिमा का विशेष महत्व है। दूर-दूर से भक्त यहां आकर माता का दर्शन-पूजन करते हैं।



इस बार भी कंधे पर नहीं जाएगी दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा
गोरखपुर। दुर्गाबाड़ी में सोमवार की रात पुलिस प्रशासन के साथ बंगाली समिति, राघव शक्ति मिलन, रामलीला समिति बर्डघाट, एनई रेलवे दुर्गा पूजा समिति की बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा इस बार भी कंधे पर न जाकर रथ पर जाएगी। वहीं राघव शक्ति मिलन रात 10 बजे से पहले कराने पर सहमति बनी। बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, पथ प्रकाश, सड़क को गड्ढा मुक्त करने के साथ ही अन्य मांग रखी। जिसपर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने सहमति दी।
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बैठक में एडीएम सीटी अंजनी कुमार सिंह, सीटी मजिस्ट्रेट मंगलेश दूबे, एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई, सीओ कोतवाली अनुराग सिंह, सुनीता सिंह, राजेन्द्र सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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