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पर्यटकों का रखा जाएगा ख्याल: गोरखपुर के इन तीन प्राचीन मंदिरों की बदलेगी सूरत, 3.27 करोड़ से होगा जीर्णोद्धार

Wed, 07 Jun 2023 12:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि शासन को बेलघाट के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, सहजनवां और पिराइच के प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार सहित पर्यटक सुविधाओं से संबंधित कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था, शासन ने इसे स्वीकृत करते हुए, बजट की पहली किस्त जारी कर दी है।
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बेलघाट दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, पिपराइच और सहजनवां शिव मंदिर को होगा जीर्णोद्धार
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तीन प्राचीन मंदिरों की सूरत बदलने वाली है। यहां आने वाले पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था सहित अन्य कई तरह सुविधाएं मिलेंगी। पर्यटन विभाग ने करीब 3.27 करोड़ रुपये से बेलघाट के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, सहजनवां के शाहपुर में स्थित बाबा भुलेश्वरनाथ प्राचीन शिव मंदिर और पिपराइच के लखसरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार और पर्यटक सुविधाओं से संबंधित काम कराएगा। इसके लिए शासन से बजट भी जारी हो गया है।

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गोरखपुर जिले के खजनी विकास खंड के ग्राम बेलघाट में स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में लगभग एक करोड़ रुपये से सभागार भवन का निर्माण, यात्री शेड, डोरमेट्री हॉल, पंडाल निर्माण, शौचालय, इंटरलॉकिंग, सोलर लाइट संबंधी कार्य कराए जाएंगे।

सहजनवां क्षेत्र के शाहपुर में स्थित प्राचीन भुलेश्वरनाथ शिव मंदिर में 1.26 करोड़ रुपये से गेस्ट हाउस, शौचालय, डोरमेट्री, किचेन, रिटेनिंग वॉल, बेंच, लैंडस्केपिंग, स्ट्रीट लाइट आदि के काम होंगे। इसी तरह पिपराइच के लखसरा में स्थित शिव मंदिर 1.1 करोड़ रुपये से जन सुविधा, गेस्ट हाउस, शौचालय, डोरमेट्री, किचेन, रिटेनिंग वॉल, बेंच, लैंडस्केपिंग, स्ट्रीट लाइट आदि कराए जाएंगे। तीनों कार्यों के लिए 1.5 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया गया है।
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क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि शासन को बेलघाट के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, सहजनवां और पिराइच के प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार सहित पर्यटक सुविधाओं से संबंधित कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था, शासन ने इसे स्वीकृत करते हुए, बजट की पहली किस्त जारी कर दी है।

 

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पीपल के पेड़ से निकली थी हनुमानजी की प्रतिमा

खजनी विकास खंड के बेलघाट में स्थित प्राचीन दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। दूर-दूर से भक्त मंदिर में पहुंच हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं।

मंदिर के पुजारी शिव दास गिरी ने बताया कि पहले यहां पर जंगल हुआ करता था। जंगल के बीच में एक पीपल का पेड़ था। पूरे जंगल में सिर्फ पीपल के पेड़ पर ही जुगनू चमकते थे। एक दिन पीपल का पेड़ बीच से फट गया और उसमें से हनुमानजी की मूर्ति प्रकट हुई। इसके बाद लोगों ने मूर्ति की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। मंदिर के बगल के गांव टिकुलियाडांड निवासी जगन्नाथ राय ने करीब 300 वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया।

स्वयंभू हैं बाबा भुलेश्वरनाथ
सहजनवां क्षेत्र के शाहपुर गांव में स्थित बाबा भुलेश्वर नाथ मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है। मंदिर के पुजारी लल्लन गिरि ने बताया कि जहां मंदिर बना है पहले वहां बाग था। शाहपुर गांव के निवासी भूलई यादव सहित कुछ गांव के लोग अपने पशु को यहां चरा रहे थे। अचानक बारिश होने लगी तो वह पेड़ के नीचे बैठ गए। इस बीच भुलाई यादव की निगाह उभरी हुई जमीन पर पड़ी। जब वे उसके नजदीक गए तो देखा कि जमीन के अंदर से शिवलिंग निकली हुई थी। इसके बाद यह बात आसपास के क्षेत्र में फैल गई। बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर पूजा-पाठ करने लगे। स्थानीय लोगो ने चंदा एकत्रित कर उस स्थान पर मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। इस स्थान को भूलेश्वरनाथ के नाम से जाना जाता है।

अत्यंत प्राचीन है लखेसरा शिव मंदिर
जिले के पिपराइच के लखेसरा में स्थित शिव मंदिर अत्यंत प्राचीन है। इसका कोई प्रमाण नहीं है कि मंदिर कब का है। लखेसरा प्रधान प्रतिनिधि गुड्डू सिंह ने बताया कि मंदिर से लोगों की गहरी आस्था है, दूर-दूर से भक्त मंदिर पहुंचकर महादेव का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन करते हैं। बाबा भी भक्तों को निराश नहीं करते और भक्तों की सभी मुरादें पूरी करते हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार सहित पर्यटन से जुड़े कार्याें से लोगों में खुशी है।
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