संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले कवि, गीतकार व नाटककार भिखारी ठाकुर बहुआयामी प्रतिभा के धनी रहे। प्रसिद्ध लोक नाट्य शैली ''''विदेशिया'''' के जनक भिखारी ठाकुर ने लोगों में जनचेतना जागृत की।
ये बातें ऑल इंडिया महापद्मनंद कम्युनिटी एजुकेटेड एसोसिएशन की ओर से गंगानगर में आयोजित पद्मश्री भिखारी ठाकुर की जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि विनय कुमार शर्मा ने कही।
उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर ने सामाजिक समस्याओं और मुद्दों पर बोल-चाल की भाषा में गीतों की रचना की। भिखारी ठाकुर पर वरिष्ठ लेखक संजीव ने एक उपन्यास ''''सूत्रधार'''' की रचना भी की है। महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें ''''भोजपुरी का शेक्सपीयर'''' कहा था।
पूर्व जिला संरक्षक नकछेद नंद ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने प्रचलित नाटकों से अलग स्वयं नाटक लिखे, जिसे वे ‘नाच’ या ‘तमाशा’ कहते थे, जिनमें समाज के तलछट के लोगों के सुख-दुख, आशा-आकांक्षा का चित्रण होता था। कार्यक्रम को श्रीभागवत नंद, गब्बर शर्मा, राजेश शर्मा आदि ने भी संबोधित किया। संचालन आरडी नंद व धन्यवाद ज्ञापित बचऊ नंद ने किया।
इस अवसर पर बैजनाथ शर्मा, साधुसरन शर्मा, रामकरन नंद, अभिषेक शर्मा, अशोक शर्मा, रामाश्रय शर्मा, उमेश शर्मा आदि मौजूद रहे।