विशेषज्ञ बोले-मिलावटखोरों पर सख्ती के कानून हैं पर उसे प्रभावी बनाने की पहल जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कहते हैं कि स्वस्थ शरीर के लिए शुद्ध और पौष्टिक आहार जरूरी है लेकिन मौजूदा समय में हरी सब्जी, फल, दूध-दही, पनीर, मिठाई, मसाला सहित खान-पान की सभी सामग्रियों में मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं। जिसे हम सेहत के लिए फायदेमंद समझकर खा रहे हैं उसी से सेहत बिगड़ रही है। कम उम्र में ही बीमारियां जकड़ ले रही हैं। सबसे ज्यादा कैंसर के मामले भी इसी से हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति को सोचने की जरूरत है। जागरूकता ही उपाय है। मिलावटखोरों पर सख्ती के नियम बने हैं पर उसे धरातल पर लाने की पहल जरूरी है।
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पूर्वांचल में मिलावट का धंधा कुछ ज्यादा ही है। खान-पान के सामान के साथ ही दवाओं में भी मिश्रण हो रहा है। हमें पौष्टिक भोजन की जगह मिलावट वाला जहर मिल रहा है। लोगों में रुपये कमाने की हवस इस कदर हो गई है कि किसी की जान जाए कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरा मानना है कि जब तक लोगों में भय पैदा नहीं होगा मिलावट कम नहीं होने वाला। नीति निर्धारकों और नियमों का पालन कराने वालों को भी सोचना होगा वरना हर कोई इसका शिकार होगा।
-प्रो डीके सिंह, पूर्व आचार्य डीडीयू व वनस्पति विज्ञानी
आज के समय में जब अधिकतर खाद्य पदार्थ रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से प्रभावित हैं, तब स्वस्थ जीवन के लिए भोजन की आदतों में बदलाव बेहद जरूरी हो गया है। मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, रागी और कोदो जैसे मिलेट्स को अपने आहार में शामिल करें, जो न केवल पौष्टिक हैं बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। अब खान-पान की वस्तुओं में मिलावट जोरो पर है तो कुछ सावधानी बरत कर इससे बच सकते हैं। मसलन, खरीदारी करते समय जागरूक रहें। सरसों और खड़ा मसाला, हल्दी, मिर्च खरीदकर पिसवा लें। खुद पनीर बनाएं, बाजार की मिठाई कम खाएं। फलों को गुनगुने पानी से धोकर खाएं।
- प्रो. कलावती शुक्ला, पूर्व विभागाध्यक्ष, बॉटनी, डीडीयू