गोरखपुर में चौड़ी सड़कों पर सरपट दौड़ती गाड़ियों के बीच ही हादसों की संख्या भी बढ़ गई है। जिले के सर्वाधिक हादसों वाले ब्लैक स्पॉट की संख्या अब 15 हो गई है, जो पिछले साल तक 12 थीं। इसमें शहर के भी तीन जगहों को शामिल किया गया है, जहां पर रफ्तार जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
यातायात माह में पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया और इन्हीं जगहों पर सुधार की कोशिश भी की है। कई जगहों पर संकेतक भी लगा दिए गए हैं, लेकिन अब भी लोग उसकी अनदेखी कर रहे हैं और हादसों में जान जा रही है। यह हाल तब है, जब अभी कोहरा भी नहीं है। कोहरा के समय इन अंधे मोड़ और कट के आगे अगर खुद संभल कर नहीं चले तो जान जोखिम में पड़ सकती है।
जानकारी के मुताबिक, जिले में आए दिन सड़क हादसे के मामले सामने आ रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता है, जिस दिन कोई सड़क हादसे में घायल न होता हो या फिर जान न गंवा देता हो। इसे लेकर ट्रैफिक पुलिस ने सख्ती भी की, हेलमेट, सीट बेल्ट पर जोर दिया गया, लेकिन आज भी हादसों में सामने आता है, इसका इस्तेमाल लोग सिर्फ पुलिस से चालान बचाने को करते हैं।
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हाईवे पर दो पहिया से चलते वक्त सिर पर या तो हेलमेट होता नहीं है या फिर घटिया क्वालिटी का होता है, जो टूट जाता है और जान चली जाती है। वहीं, कार के हादसों में सामने आता है कि रफ्तार तेज थी, लेकिन सीट बेल्ट न होने की वजह से एयरबैग नहीं खुल पाता है।
अब जब शहर में निर्माण काम चल रहा है तो हादसे की संभावना और बढ़ जाती है। क्योंकि जितने जगहों पर काम चल रहा है, वहां पर कोई संकेतक भी नहीं लगाए गए हैं। सड़क किनारे ही गड्ढे हैं, जिस पर अगर आप रोज नहीं चलते हैं तो हादसा होना तय है।
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