जिला अस्पताल वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके सुमन ने कहा कि नियमित तापमान के मुकाबले दिन व रात के तापमान में घटाव-चढ़ाव लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। ऐसी दशा में सर्दी, जुकाम, सिरदर्द, गले में खराश, खांसी, पेट दर्द आम है। इन बीमारियों से बचने के लिए सामान्य पानी का सेवन और गर्म पानी का भाप लेना चाहिए। गले में खराश होने पर गर्म पानी से गरारा करना चाहिए।
जिला अस्पताल बाल रोग विशेषज्ञ डॉ गणेश कुमार ने कहा कि जिला अस्पताल के ओपीडी में रोज लगभग 150 बच्चे आ रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत को उल्टी, दस्त, पेट दर्द व हल्के बुखार की शिकायत है। जांच में ज्यादातर में टाइफायड निकल रहा है। गर्मी के मौसम में आंतों में बैक्टीरिया तेजी से अपना फैलाव करते हैं। ऐसे में यदि दूषित जल या भोजन लिया जाए तो उनकी वृद्धि में और इजाफा होता है। इस वजह से बच्चों में हल्का बुखार, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, सर्दी-खांसी, जुकाम आदि की दिक्कतें तेजी से बढ़ी हैं।
बरते यह सावधानियां
- बाहर निकलते समय खुद को ठीक से ढककर निकले, टोपी पहने, फूल शर्ट पहनें
- मसालेदार भोजन से बचें, हरी सब्जियों का सेवन जरूरी
- फ्रीज का पानी पीने से बचना चाहिए।
- रात में एसी चलाकर न सोएं।
- पूरी बांह का कपड़ा पहनकर ही घर से बाहर निकलें
- सर्दी, खांसी, जुकाम होने पर बिना चिकित्सक की सलाह के कोई दवा न लें।
बच्चों को ऐसे बचाएं
- सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- बच्चों को खाना खिलाने से पहले अच्छी तरह हाथ धुलें।
- खाना बनाते और परोसते समय सफाई रखें।
- बच्चों को पानी उबाल कर ही पिलाएं।
- छह महीने से छोटे शिशुओं को केवल मां का दूध पिलाएं
- बच्चों को शौच के बाद साबुन से हाथ धुलने की आदत डलवाएं।