विदेश मंत्रालय ने प्रोफेसर बलराम शुक्ल को सेक्रेटरी-वन का दर्जा देते हुए ईरान में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र का निदेशक नियुक्त किया है। इस पद पर उनका दर्जा प्रथम राजनायिक का होगा। वे भारत के सांस्कृतिक राजदूत कहे जायेंगे ।
डॉ. बलराम शुक्ल मूल रूप से महराजगंज जिले के भिटौली बाजार कस्बे के समीप सोहरौना राजा गांव के रहने वाले हैं। इनके पिता रामचन्द्र शुक्ल जूनियर हाई स्कूल महराजगंज के अवकाश प्राप्त शिक्षक हैं। डॉ शुक्ल गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत और फारसी साहित्य में परास्नातक किया।
इन दोनों विषयों में विश्वविद्यालय टॉप करने पर डॉ सीडी देशमुख पुरस्कार प्राप्त किया। इन्होंने अरबी भाषा के उच्चतर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम को भी उच्च अंकों के साथ उत्तीर्ण किया। डॉ शुक्ल संस्कृत तथा फारसी दोनों भाषाओं के कवि हैं।
इन्होंने ईरान के विश्व कवितासमारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वर्तमान में डॉ शुक्ल दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, यहीं से इनको डेपुटेशन पर विदेश मंत्रालय ने ईरान की राजधानी तेहरान भेजा है।