फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चौरीचौरा घटना में क्रांतिकारियों को फांसी की सजा से विचलित हो गए थे बाबा राघवदास, ऐसे बचाई थी लोगों की जान

Tue, 02 Feb 2021 03:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
विज्ञापन
बाबा राघवदास। (फाइल फोटो) - फोटो : BRDMC
विज्ञापन

चौरी चौरा घटना के 100 वर्ष पूरा होने पर शहीदों के सम्मान में सरकार शताब्दी महोत्सव आयोजित कर रही है। जिसे यादगार बनाने के लिए अधिकारिक तौर पर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। चौरीचौरा घटना में सत्र न्यायालय ने 172 अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई थी।

विज्ञापन


जिससे बाबा राघवदास विचलित हो गए थे। उन्हें फांसी से बचाने के लिए इलाहाबाद के नामचीन हस्तियों से संपर्क कर बाबा राघवदास ने लड़ाई लड़ी थी। जिसमें कुछ को फांसी से नहीं बचाया जा सका था। जिसकी टीस बाबा राघवदास को हमेशा सालती रही।

नगर स्थित अनंत आश्रम के दूसरे पीठाधीश्वर बाबा राघवदास पूर्वांचल के गांधी कहे जाते थे। क्रांतिकारियों के लिए आश्रम महफूज स्थली था। अनंत आश्रम का जिक्र गजेटियर में भी आता है। चौरीचौरा कांड में 172 से अधिक क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
विज्ञापन


पीठाधीश्वर आंजनेय दास का कहना है कि बाबा राघवदास जनशताब्दी स्मारिका में जिक्र है कि क्रांतिकारियों को फांसी की सजा से बचाने के लिए दूसरे पीठाधीश्वर ने मोती लाल नेहरु, पंडित मदनमोहन मालवीय आदि से संपर्क कर 153 क्रांतिकारियों की सजा माफ कराया था।

 

विज्ञापन

पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की है समाधिस्थली, लगता है मेला

चार फरवरी 1922 को बेकसूरों पर अंग्रेजी सिपाहियों ने गोली बरसाया था। जिसमें कुछ आंदोलनकारी शहीद हो गए थे। भीड़ ने चौरीचौरा थाने को घेरकर आग के हवाले कर दिया था। जिसमें दर्जनों अंग्रेजी सिपाही मारे गए थे। चौरीचौरा कांड से दुखी होकर महात्मा गांधी ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था। 1928 में एक बार फिर बापू का पूर्वांचल में आना हुआ था। जिन्होंने अनंत आश्रम में 15 मिनट के अधिवेशन को संबोधित किया था। आजदी की लड़ाई में लोगों ने उनका पुरजोर सहयोग किया था।  

अनंत आश्रम में बाबा राघवदास द्वारा क्रांति के महानायक पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की समाधिस्थली बनवाया गया है। जहां हर वर्ष उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। बताया जाता है कि फांसी से पूर्व बिस्मिल ने अपना मृत शरीर बाबा राघवदास को सौंपने की इच्छा जाहिर किया गया था।

1942 में आजाद हो गया था बरहज
स्वतंत्रता आंदोलन में नगर क्षेत्र का भी योगदान रहा है। जहां अंग्रेजों के खिलाफ पैना की सैकड़ों महिलाओं ने जौहर दिखाते हुए शहीद हो गई थीं। वहीं 14 अगस्त 1942 को सरयू में विलीन हो चुका गांव कुरह परसियां निवासी स्व.लक्ष्मी मिश्र के तीसरे नंबर के पुत्र पंडित विश्वनाथ मिश्र और बरौली निवासी जगन्नाथ मल्ल ने समर्थकों के साथ तिरंगा फहराकर बरहज को आजाद घोषित कर दिया था। जहां कैप्टन मूर की गोली से दोनों रणबांकुरे शहीद हो गए थे। लोगों की मानें तो आजादी के 72 साल बाद भी अनंत आश्रम में स्थापित पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की समाधिस्थली, मुख्य चौक पर पंडित विश्वनाथ मिश्र, जगन्नाथ मल्ल और पैना शहीद स्थली उपेक्षाओं का शिकार है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें