गोरखनाथ मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है लेकिन देवी देवताओं की पूजा परंपरागत रूप से रोज होती है। इन देवी देवताओं को चढ़ाने के लिए फूल और माला पहले बनारस से आता था लेकिन कोरोना की वजह से अब ऐसा नहीं हो पा रहा है।
मंदिर के सचिव द्वारका तिवारी बताते हैं कि सुबह मंदिर के पुजारी देवी देवताओं की पूजा में 50 माला व करीब 2 बैग फूल, देवी-देवताओं को चढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि सभी देवताओं के गले में माला डाली जाती है, उसके बाद फूलों से उन्हें सजाया भी जाता है। सर्वाधिक फूल गुरु गोरखनाथ को सजाने में लगता था। पहले माला और फूल बनारस से आता था लेकिन अभी लॉकडाउन की वजह से फूल-माला नहीं आ पा रहा है। हालांकि ठेकेदार को फूल माला लाने के लिए शासन की तरफ से आज्ञा मिला है।
ठेकेदार का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से किसान अपने फूलों को बाजार तक पहुंचा ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में फूल नहीं आ रहे हैं। कोरोना जैसी विकट स्थिति आने के बाद मंदिर में लगे कुछ फूल तोड़कर माला बनाया जाने लगा और देवी देवताओं को चढ़ाया जाने लगा।
लेकिन जब रोज फूलों की समस्या आने लगी तो शहर के तमाम ऐसे उद्योगपति व बड़े लोग हैं जिनके लॉन में भारी संख्या में फूल पत्ती लगे हुए हैं उनसे संपर्क किया गया। इसमें ओम प्रकाश जालान, चंद्र प्रकाश अग्रवाल, अजीत सरिया व कुछ अन्य लोगों से कहा गया तो उन लोगों के घर में लगे फूलों को तोड़कर अब माला बनाया जाता है। और उन्ही मालाओं व फूलों से देवी देवताओं को सजाया जाता है। इस तरह से हर रोज मंदिर में पूजा अर्चना संपन्न हो रहा है।