अविनाश कौर, रोइंग अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी।
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म्हारी छोरिया छोरो से कम हैं के। यह वाक्य हरियाणा की बेटी अविनाश कौर पर बिल्कुल सटीक बैठता है। रोइंग खेल में अविनाश कौर ने नेशनल ही नहीं, एशियन गेम्स इनडोर में तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। खेलो इंडिया के अंतर्गत रामगढ़ताल में आयोजित 2000 मीटर डबल स्कल के मुकाबले के उन्हाेंने फाइनल में जगह बनाई है।
हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली अविनाश ने 16 वर्ष की उम्र में रोइंग प्रतियोगिता की शुरुआत की थी। इसकी प्रेरणा उन्हें अपने पिता से ही मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अविनाश ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में तीन गोल्ड, दो सिल्वर, एक ब्रांज मेडल के साथ ही नेशनल गेम्स में दो सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं। 2019 थाईलैंड एशियन इनडोर रोइंग प्रतियोगिता में अविनाश ने तीन गोल्ड मेडल जीते थे। वह रोइंग वर्ल्ड कप में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। उनका लक्ष्य ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है।
गोरखपुर के अनुभव को साझा करते हुए अविनाश ने बताया कि यहां आकर उन्हें लग रहा है कि वह घर से बाहर आई ही नहीं है। यहां मौसम बहुत अच्छा है, बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।
पिता ओलंपिक की रोइंग प्रतियोगिता में देश प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी
अविनाश के पिता इंद्रपाल सिंह पहले भारतीय हैं, जिन्होंने ओलंपिक की रोइंग प्रतियोगिता में देश प्रतिनिधित्व किया। इंद्रपाल सिंह अर्जुन अवार्डी होने के साथ भारतीय खेल परिषद के सदस्य और अविनाश के कोच भी हैं। उनकी मां सुखजिंदर कौर भी रोइंग खिलाड़ी रही हैं। भाई परमिन्दर रोइंग के एशिया टॉप रैंक के खिलाड़ी हैं। वह इन दिनों एशियन गेम्स की तैयारी के लिए हैदाराबाद में नेशनल कैंप में हैं।