गोरखपुर के असुरन पोखरा के मामले में अब कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने भी सख्ती की है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल के पत्र पर उन्होंने जीडीए के उपाध्यक्ष अनुज सिंह तथा नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह को कई निर्देश दिए हैं। कहा है कि पोखरे की जमीन पर नक्शा पास करने और वहां सड़क-नाली बनाने वालों की जवाबदेही तय करते हुए उनपर कार्रवाई की जाए। इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह में देने को भी कहा है।
असुरन पोखरा की जमीन पर करीब 155 मकान बन चुके हैं। पोखरे की जमीन पर कालोनी बसने का मामला भी वर्ष 2010 में उठ चुका है। उस वक्त कमिश्नर रहे पीके महांति ने जमीन बेचने वाले परिवार को सर्किल रेट के बराबर जमीन देने का निर्देश दिया था। यह भी चेतावनी दी थी कि एक महीने में जमीन नहीं देने की दशा में पोखरे की जमीन पर हुए सभी निर्माण ध्वस्त करा दिए जाएंगे।
उन्होंने जीडीए और नगर निगम को भी मकानों का मानचित्र स्वीकृत करने और पोखरे की जमीन पर सड़क, नाली बनाने वालों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई के लिए लिखा था। मगर कोई कार्रवाई हुई नहीं।
रिपोर्ट मांगी है, करा रहे हैं जांच
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने ताल-पोखरों की जमीन से कब्जा हटाने के अभियान के क्रम में जब यहां के लोगों को नोटिस दिया तो लोगों ने 2010 में हुए समझौते का हवाला दिया। उन्होंने जीडीए और नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाए। उनपर भी कार्रवाई के लिए कमिश्नर को पत्र लिखा था। इसी क्रम में कमिश्नर ने दोनों विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जीडीए के सचिव राम सिंह गौतम का कहना है कि कमिश्नर ने असुरन पोखरा मामले में रिपोर्ट मांगी है। जांच कराई जाएगी।
जमीन बेचने वाले ऋषभ जैन को भी चेतावनी
कमिश्नर की इस सख्ती के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जमीन बेचने वाले ऋषभ जैन को भी एक और नोटिस देकर कहा है कि समझौते के मुताबिक जल्द मुफीद जमीन उपलब्ध कराएं नहीं तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि ऋषभ जैन की तरफ से अब तक छह भूखंडों का प्रस्ताव दिया गया है। इनमें से चार खारिज कर दिए गए हैं। बरगदवां और दौलतपुर की जमीन की पड़ताल चल रही है।
ताल सुमेर सागर मामले में जवाबदेही तय नहीं
असुरन पोखरा मामले में कमिश्नर ने जीडीए और नगर निगम पर सख्ती की है मगर ताल सुमेर सागर के मामले में अभी तक कोई जवाबदेही नहीं तय हो सकी है। इस मामले में कमिश्नर ने करीब आठ महीने पहले ही जीडीए व निगम को पत्र लिखा था। जीडीए ने सिर्फ जारी किए गए मानचित्र को निरस्त कर कार्रवाई पूरी मान ली जबकि निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि कमिश्नर ने जीडीए और नगर निगम दोनों को पत्र लिखकर असुरन पोखरा की जमीन पर निर्माण कराने के लिए मानचित्र स्वीकृत करने वाले और वहां सड़क, नाली समेत अन्य विकास कार्य कराने वालों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। तहसील प्रशासन की तरफ से जमीन बेचने वाले परिवार को भी नोटिस दिया गया है।