टीबी संक्रमण को लेकर केंद्र सरकार के रिपोर्ट कार्ड में उत्तर प्रदेश 105% लक्ष्य हासिल कर पहले स्थान पर है। टीबी मुक्त भारत अभियान से प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ने के बाद यहां सात साल में 16 गुना ज्यादा टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है।
उत्तर प्रदेश पहले दो महीने में सबसे ज्यादा मरीजों की पहचान करके इस साल भी आदर्श राज्य बनने की राह पर है। 2017 में केंद्र ने सिर्फ सरकारी अस्पतालों तक सीमित टीबी संक्रमण की मुहिम में प्राइवेट अस्पतालों को भी शामिल किया। अस्पतालों से टीबी के मरीजों की पहचान करने, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उपचार पूरे होने पर जोर देने के लिए कहा गया।
फिलहाल यह मॉडल उच्च टीबी बोझ व निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के उच्च घनत्व वाले राज्यों के 300 से अधिक जिलों में चालू है। इस पहल के परिणामों का सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश है। यहां 2017 तक सालाना 15,632 टीबी मरीजों के बारे में प्राइवेट अस्पतालों से जानकारी मिल रही थी, लेकिन 2024 में निजी अस्पतालों के सहयोग से राज्य सरकार टीबी के 2,52,240 नए मरीजों तक पहुंचने में सफल रही।
]ज्यादा मरीज का मतलब संक्रमण ज्यादा होना नहीं
राज्य टीबी अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर 36 फीसदी टीबी मरीजों की पहचान प्राइवेट अस्पतालों के जरिये हो रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह ग्राफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा टीबी मरीज मिलने का मतलब यह नहीं है कि यहां संक्रमण का प्रसार बहुत अधिक है। यहां मरीज इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि हम समय रहते उन मरीजों तक इलाज पहुंच पा रहे हैं।