गोरखपुर में ज्योतिषविद् और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की जयंती शनिवार को सूरजकुंड धाम (पोखरा) पर धूमधाम से मनाई गई। भव्य समारोह में चिकित्सा, शिक्षा, कानून, व्यापार और कृषि से जुड़े समाज के हर के वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
संयोजक गजेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि दुनिया को शून्य और दशमलव का ज्ञान देने वाले इस महान गणितज्ञ की जयंती पिछले 19 वर्षों से अनवरत मनाई जा रही है। मुख्य अतिथि विद्या भूषण पांडेय ने कहा कि आर्यभट्ट ने विश्व में सबसे पहले यह अनुमान लगाया था कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। उन्होंने ही गणित की मूल अवधारणाओं का विकास किया था, जिसके आधार पर खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
कार्यक्रम संचालक ईश्वर चंद्र गुप्ता ने कहा कि गीतिकापद, गणितपद, कलाक्रियापद, गोला पद की रचना करने वाले महान मनीषी का सम्मान देव-कोटि में किया जाता है।
मुख्य वक्ता डॉ. व्यास मुनि मिश्र ने कहा कि आर्यभट्ट का चिंतन एक गणितज्ञ और ज्योतिषी के रूप में इतना महत्वपूर्ण था कि प्रथम भारतीय उपग्रह ''''''''आर्यभट्ट'''''''' का नाम उनके सम्मान में रखा गया। इस दौरान संजय दूबे, सत्येंद्र पांडेय, हंसनाथ यादव, अविनाश भट्ट, अजय शर्मा आदि मौजूद रहे।