-नगर निगम सदन की 22वीं बैठक बुधवार को सुबह 11 बजे मेयर की अध्यक्षता में होगी
-17 माह पहले लोकार्पित हाइब्रिड पशु शवदाह गृह के बंद होने पर पार्षद उठाएंगे सवाल
-मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था और प्लांट संचालन में लापरवाही पर होगी चर्चा
गोरखपुर। नगर निगम सदन की 22वीं बैठक बुधवार को सुबह 11 बजे सदन हाल में मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में होगी। बैठक में 31.50 करोड़ रुपये की पार्षद वरीयता की दूसरी किस्त जारी करने की स्वीकृति पर मुहर लगने की उम्मीद है। इसके साथ ही करीब 17 माह पहले लोकार्पित सूबे के सबसे बड़े और पहले हाइब्रिड पशु शवदाह गृह के लंबे समय से बंद होने का मामला भी सदन में गरमाएगा। मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवाल पर चर्चा होगी।
नगर आयुक्त अजय जैन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, सदन में 15 जुलाई को हुई 20वीं और 16 जुलाई को हुई 21वीं बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की जाएगी। वहीं, 26 मई को हुई 18वीं और तीन जुलाई को हुई 19वीं बैठक में शोक प्रस्ताव होने के कारण किसी अनुपालन की जरूरत नहीं होने की जानकारी सदन के समक्ष रखी जाएगी। मेयर की अनुमति से अन्य विषय भी बैठक में रखे जा सकेंगे।
वार्ड-23 शहीद शिव सिंह क्षेत्री नगर के पार्षद चंद्रभान प्रजापति ने मेयर को पत्र भेजकर मृत गोवंश के निस्तारण की व्यवस्था पर सदन में चर्चा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ने करोड़ों रुपये खर्च कर पशु शवदाह गृह तैयार कराया है, लेकिन मृत पशुओं की सूचना देने पर संबंधित वार्ड के सुपरवाइजर और कर्मचारी उन्हें दफनाने की बात कहते हैं। ऐसे में शवदाह गृह बनाने और उसके संचालन का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। पार्षद ने व्यवस्था में सुधार के साथ पशु शवदाह गृह तैयार करने वाली फर्म के काम की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मृत गोवंश को दफनाने की व्यवस्था ही रखनी है तो शहर से बाहर करीब दो एकड़ जमीन चिह्नित की जाए।
नगर निगम ने एकला बांध पर नौसढ़ के बरिया टोला में करीब 4.50 करोड़ रुपये से हाइब्रिड पशु शवदाह गृह बनाया था। अप्रैल 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका लोकार्पण किया था। पीएम प्रोजेक्ट एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने इसे स्थापित करने के साथ संचालन की जिम्मेदारी संभाली थी। दावा किया गया था कि बिजली और गैस आधारित व्यवस्था से प्लांट में प्रति घंटे एक हजार किलोग्राम तक पशु शवों का वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार किया जा सकता है। हालांकि लोकार्पण के करीब एक माह बाद ही प्लांट बंद हो गया और पिछले करीब एक वर्ष से इसका संचालन ठप है।