शहरी क्षेत्र के लोगों को जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। विद्यालयों में बच्चों का प्रवेश कराने वाले लोगों को प्रमाण पत्र के लिए बेसब्री से इंतजार है, जबकि एक माह पहले हुए आवेदनों पर भी रिपोर्ट नहीं लगी है।
नगर निगम के दो जोन में ही जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के 750 आवेदन अटके हुए हैं, जबकि शहर को पांच जोन में बांटा गया है। नगर निगम कार्यालय के जोन एक और तीन में बृहस्पतिवार को आवेदन करने वाले पहुंच रहे थे, सबसे अधिक बच्चों के प्रवेश कराने वाले लोगों की चिंता दिखी। दोनों जोन में 664 जन्म प्रमाण पत्र के आवेदन पर अब तक रिपोर्ट नहीं लग सकी है, जबकि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 86 आवेदन लंबित हैं। एक निगम कर्मी ने बताया कि जिन लोगों ने जन्म और मृत्यु के एक साल बाद आवेदन किया है, उन मामलों में जनवरी के भी कुछ आवेदन लंबित है। रिपोर्ट आ रही है तो प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
क्यूआर कोड के कारण परेशानी
नगर निगम ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रमाण पत्रों पर क्यूआर कोड देना शुरू किया है, लेकिन यह कोड ही कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बन रहा है। सूरजकुंड के सुभाषचंद्र बोस नगर की प्रीति ने बताया कि वर्ष 2018 में उनकी मां का निधन हुआ था तो नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। उस समय क्यूआर कोड व्यवस्था लागू नहीं हुई थी। उन्होंने पुराने मृत्यु प्रमाण पत्र को बैंक में लगाया तो बैंक अधिकारियों ने उसे रिजेक्ट कर दिया, जबकि नगर निगम को पुराने रिकॉर्ड के अनुसार आसानी से प्रमाण पत्र जारी करना चाहिए। उन्होंने फिर से आवेदन किया है और पुराने मामले के कारण एसडीएम के आदेश के बाद ही अब उन्हें प्रमाण पत्र मिल सकेगा।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जोन के अधिकारियों के साथ बैठक की गई थी। एक साल के बाद जो आवेदन हुए हैं, उनमें एसडीएम कार्यालय से रिपोर्ट आते ही तत्काल प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है।
दुर्गेश मिश्रा, अपर आयुक्त नगर निगम