गोरखपुर विश्वविद्यालय अब पूर्वांचल में शिक्षा का केंद्र बनेगा। नैक का ए प्लस-प्लस ग्रेड मिलने के बाद इस दिशा में तेजी से काम होगा। नए स्टार्टअप शुरू होंगे, कैंपस चयन के लिए मल्टीनेशनल कंपनियों को बुलाया जाएगा।
कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि अब विदेश और देश के दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी पढ़ने के लिए आकर्षित होंगे। विवि में विदेशी छात्रों के लिए अलग से हॉस्टल है। अच्छे छात्र आएंगे तो पढ़ाई का माहौल तैयार होगा।
उन्होंने कहा कि विवि में अभी प्रवेश परीक्षा में एक सीट के लिए दस विद्यार्थी शामिल होते हैं। यह संख्या और बढ़ेगी। महाविद्यालयों में भी बेहतर संदेश गया है। कुलपति ने कहा कि ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने के बाद केंद्र सरकार खेल संसाधन के 50 करोड़ और स्किल डेवलपमेंट और इंटरप्रानेरशिप के लिए 50 करोड़ रुपये देगी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अब राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क ( एनआईआरएफ) की रैंकिंग के लिए आवेदन करेगा। 20 जनवरी तक आवेदन की अंतिम तिथि है। इससे पहले प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। विधि और एमबीए की ओर से आवेदन किया गया है।
कुलपति ने कहा कि शहर के सभी अच्छे कॉलेजों का कॉमन एंट्रेंस टेस्ट कराने की योजना है, ताकि अच्छे विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर प्रवेश मिले। इस संबंध में जल्द ही कॉलेजों के प्राचार्य के साथ बैठक करेंगे। कॉलेजों को भी नैक का मूल्यांकन कराना अनिवार्य है। जो कॉलेज ऐसा नहीं करेंगे, उनके नए कोर्स को स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
कल कुलाधिपति से मिलेगी विवि की टीम
नैक मूल्यांकन के कार्य में जुटी टीम और अधिकारी कुलपति के नेतृत्व में शुक्रवार को कुलाधिपति से मिलने लखनऊ जाएंगे। कुलपति के अनुरोध पर राजभवन से स्वीकृति मिल गई है। टीम में करीब 34 सदस्य हैं। कुलपति ने बताया कि मुख्यमंत्री ने फोन करके बधाई दी है। टीम के सदस्य मुख्यमंत्री के गोरखपुर आगमन पर उनसे मुलाकात करेंगे। दीक्षांत के सवाल पर कहा कि फरवरी में दीक्षांत समारोह आयोजित होगा। कुलाधिपति से तिथि मिलने के बाद तैयारी शुरू कर दी जाएगी।
शिक्षक-छात्रों ने कुलपति को दी बधाई
गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी और बीए-एलएलबी के शिक्षकों एवं छात्रों ने विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ला की अगुवाई में कुलपति प्रो. राजेश सिंह से मिलकर ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने पर बधाई दी। कुलपति ने विश्वविद्यालय में और बेहतर अकादमिक माहौल पैदा करने एवं शोध की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को प्रेरित किया।