महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. जय कुमार ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई काॅरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) को पत्र भेजकर एंटीबायोटिक इंजेक्शन एमोक्सिसिलीन के बैच नंबर एबी-193009, जेंटामाइसिन बैच नंबर यूडी 32 और मेटाक्लोरोमाइड के बैच नंबर एमटी 12249 पर रोक लगाने को कहा है। उन्होंने बताया कि एमोक्सिसिलीन के 310 वायल, जेंटामाइसिन के 2000 एंपुल और मेटाक्लोराेमाइड के दो हजार एंपुल की आपूर्ति यूपीएमएससीएल के ड्रग वेयर हाउस से की गई थी। इस इंजेक्शन के लगने के बाद महिलाओं की हालत बिगड़ी थी। अस्पताल प्रशासन ने इन इंजेक्शनों को ड्रग विभाग को वापस कर दिया है। साथ ही उसके इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी है।
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बीआरडी को भी भेजे गए थे वायल
एंटीबायोटिक इंजेक्शन के करीब पांच हजार डोज बीआरडी मेडिकल कॉलेज को भी भेजे गए हैं। यह सप्लाई यूपीएमएससीएल के ड्रग वेयर हाउस से की गई है। बीआरडी प्रशासन ने भी संबंधित बैच की जांच शुरू कर दी है। बीआरडी के नेहरू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार राय ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। संबंधित बैच को दिखवाया जा रहा है। अगर उस बैच के इंजेक्शन होंगे तो उसे अलग कराया जाएगा।
तीनों इंजेक्शन के एक-एक वायल जांच के लिए भेजे गए
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि तीनों एंटीबायोटिक इंजेक्शन के एक-एक वायल का नमूना लिया गया है। इसे जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा। एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट आएगी। तब तक इस बैच के इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
महिला अस्पताल के 100 शैया के एमसीएच विंग में सिजेरियन प्रसव के बाद महिलाओं को भर्ती किया जाता है। बृहस्पतिवार देर रात महिलाओं को एंटीबायोटिक इंजेक्शन एमोक्सिसिलीन और जेंटामाइसिन लगाई गई। इंजेक्शन लगने के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी। एक-एक करके महिलाओं की आंखों में जलन, कपकपी, मिचली, उल्टी, खुजली होने लगी। इस पर परिजनों ने नर्सों से सवाल किया तो वह डर के मारे भागकर खुद को एक कमरे में बंद कर लीं।
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इन सबके बीच नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों से हाथापाई भी हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस और महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. जय कुमार ने तत्काल मरीजों को एंटी एलर्जी इंजेक्शन लगवाए। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ। तब जाकर मामला शांत हुआ।
जिला महिला अस्पताल एसआईसी डॉ. जय कुमार ने कहा कि महिलाओं की स्थिति अब एकदम सामान्य है। तीनों एंटीबायोटिक इंजेक्शन को ड्रग वेयर हाउस को वापस कर दिया गया है। साथ ही इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पत्र भी लिख दिया गया है। ड्रग विभाग ने तीनों इंजेक्शन की जांच के लिए सैंपल भी लिए है। शासन ने भी पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।