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नीट छात्र का किया था कत्ल: आरोपित पशु पशु तस्करों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, विरोध पर की थी हत्या

Tue, 23 Dec 2025 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

नीट की तैयारी कर रहे छात्र दीपक गुप्ता का पशु तस्करों ने अपहरण कर लिया था और बाद में उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। घटना सामने आते ही पूरे गांव में आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने पशु तस्करों की घेराबंदी की थी, जिसमें एक आरोपी पकड़ लिया गया था। हालांकि बाद में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
 
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gorakhpur student murder - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआचाफी गांव में पशु तस्करी का विरोध करने पर छात्र दीपक गुप्ता की अपहरण के बाद हत्या के मामले में एसटीएफ की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एसटीएफ ने इस हत्याकांड में शामिल चार आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
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शेष 13 आरोपियों की भूमिका को लेकर विवेचक साक्ष्य एकत्र करने में जुटे हुए हैं। जांच के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक फैले संगठित पशु तस्करी नेटवर्क की कई परतें खुलकर सामने आई हैं। जांच और साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपियों छोटू, रामलाल, राजू और रहीम की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई। इन चारों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भिजवाया जा चुका था।

अब एसटीएफ ने इन चारों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। आरोप पत्र में अपहरण, हत्या, पशु तस्करी, आपराधिक साजिश और संगठित गिरोह से जुड़े गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं।
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यह वारदात पिपराइच थाना क्षेत्र के महुआचाफी गांव में 15 सितंबर की रात हुई थी।

नीट की तैयारी कर रहे छात्र दीपक गुप्ता का पशु तस्करों ने अपहरण कर लिया था और बाद में उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। घटना सामने आते ही पूरे गांव में आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने पशु तस्करों की घेराबंदी की थी, जिसमें एक आरोपी पकड़ लिया गया था। हालांकि बाद में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

इस घटना ने न सिर्फ गोरखपुर बल्कि आसपास के जिलों में भी कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। डीजीपी के निर्देश पर इसकी विवेचना एसटीएफ को सौंपी गई थी। एसटीएफ ने जांच संभालते ही तेजी से कार्रवाई शुरू की। घटनास्थल की बारीकी से जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, वाहनों की आवाजाही, पुराने आपराधिक मुकदमों और स्थानीय संपर्कों की गहन पड़ताल की गई।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दीपक की हत्या कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि पशु तस्करी से जुड़े एक संगठित गिरोह की सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी। एसटीएफ की टीम ने गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर समेत कई जिलों में लगातार दबिश दी।

साथ ही बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी दबिश देकर नेटवर्क से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई। जांच अधिकारियों का कहना है कि चार्जशीट ठोस साक्ष्यों, तकनीकी प्रमाणों और गवाहों के बयान के आधार पर दाखिल की गई है, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

जांच में अब तक कुल 17 पशु तस्करों की संलिप्तता सामने आ चुकी है। भागे और संदिग्ध आरोपियों के खिलाफ भी साक्ष्य तेजी से जुटाए जा रहे हैं। साक्ष्य पूरे होते ही उनके विरुद्ध भी जल्द आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा: सत्यप्रकाश सिंह, इंस्पेक्टर, एसटीएफ गोरखपुर यूनिट
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