अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद में शामिल महिलाएं
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महिला सुरक्षा पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। शनिवार को आयोजित ‘अमर उजाला संवाद’ में महिलाओं ने महिला सुरक्षा, लैंगिक भेदभाव व बदलती सामाजिक सोच को लेकर खुलकर बात की। कहा कि सुरक्षित समाज की शुरुआत घर से ही होती है।
बेटा हो या बेटी, दोनों को समान रूप से सही-गलत की सीख देने के साथ सम्मान और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाना होगा। संवाद में महिलाओं ने कहा कि अक्सर सुरक्षा की जिम्मेदारी बेटियों पर ही डाल दी जाती है।
उन्हें देर तक बाहर न रहने, सावधानी बरतने और खुद को सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है, जबकि बेटों को भी महिलाओं का सम्मान करने, उनकी सीमाओं को समझने और गलत व्यवहार का विरोध करने की शिक्षा देना जरूरी है।
बच्चों की सोच बदलने के लिए परिवार को अपनी सोच बदलनी होगी। महिलाओं ने कहा कि बेटे और बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा, आजादी और फैसले लेने के अधिकार में अंतर खत्म करना होगा। बेटियों को कमजोर समझने के बजाय उन्हें आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है।
संवाद में यह भी बात सामने आई कि स्कूल और समाज को भी बच्चों को महिला सम्मान, साइबर सुरक्षा, गुड टच-बैड टच और आपात स्थिति में मदद लेने के तरीकों के बारे में जागरूक करना चाहिए। महिलाओं ने कहा कि केवल कानून बनाने से बदलाव नहीं आएगा।
कानून के साथ परिवार की परवरिश और समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। जब घर में बेटा-बेटी को बराबरी मिलेगी तभी समाज में वास्तविक समानता और सुरक्षा का माहौल तैयार होगा। महिला सुरक्षा की शुरुआत किसी अभियान से नहीं बल्कि हर परिवार में होने वाली बातचीत से होनी चाहिए।