जंगल कौड़िया (गोरखपुर)। आग उगलती सूरज की किरणों ने क्षेत्र के तालाबों को बूंद भर पानी से महरूम कर दिया है। हालत यह है कि मई महीने के दूसरे पखवाड़े की गर्मी में क्षेत्र के अधिकतर तालाबों में दरारें पड़ गई हैं। ब्लॉक क्षेत्र में बने तालाबों का मनरेगा से जीर्णोद्धार तो कुछ नए तालाब भी बनवाए गए हैं, लेकिन अधिकतर तालाबों में अभी से पानी सूख गया है। जबकि ग्रामीण अंचलों में पशु पक्षियों के लिए तालाब पोखर ही पेयजल का सबसे बड़ा स्रोत हैं। तालाबों के सूखने से मवेशियों और पक्षियों के पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। तालाबों में पानी की उपलब्धता न रही तो आगे पशु-पक्षियों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
जंगल कौड़िया ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों में निर्माणाधीन 37 अमृत सरोवर में से लगभग 20 सरोवर सूख गए हैं। क्षेत्र में मौजूद छोटे-बड़े करीब सौ तालाबों में अधिकांश के सूखने से छुट्टा पशु, नीलगाय, सियार, नेवला, बिल्ली, बंदर जैसे वन्य जीव और पक्षी परेशान हैं। ऐसे में कई बार तो नीलगायों का झुंड गांव किनारे तक पहुंच रहा है। जमुआड ताल और रसूलपुर चकिया में दिन के समय पानी के समीप रहने वाले पक्षियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है।
किसानों को सिवान में किसी मिट्टी के पात्र में जल रखना चाहिए। जल पीकर पशु और पक्षी अपना जीवन बचा सकते हैं।
-डॉ. संजय सिंह, पशु चिकित्सा अधिकारी, जंगल कौड़िया
भीटी तिवारी गांव के सरोवर में जल भरने के लिए ट्यूवेल ऑपरेटर को निर्देशित किया गया है। वन्य प्राणियों तथा पक्षियों की रक्षा के लिए प्रत्येक गांव में जलभराव की व्यवस्था शीघ्र की जाएगी।
-आफताब अहमद, खंड विकास अधिकारी जंगल कौड़िया