कोरोना वायरस के मामले भारत में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस वजह से लोगों में डर का माहौल भी हैं। यही डर युवाओं को साइको सोमेटिक का शिकार बनाता जा रहा है। मानसिक रोग विशेषज्ञ के मुताबिक डर के माहौल की वजह से भले ही लोग शारीरिक रूप से बीमार न हो रहे हो, लेकिन यह डर उन्हें मानसिक सेहत को कमजोर करने के लिए काफी है। इसका असर इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) पर भी पड़ रहा है। अगर इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो आने वाले वक्त में यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
कोरोना का डर अब लोगों में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। युवा से लेकर बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं कोरोना वायरस को बखूबी जान भी गए है। लेकिन इन सबके बीच युवा कोरोना वायरस को लेकर पैनिक भी हो रहे है। इसका असर है कि जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकली कॉलेज के मानसिक रोग (सायकायट्रिस्ट) विभाग में 20 में से 8 से 10 युवा इलाज के लिए पहुंच रहे है।
ओपीडी में युवाओं की संख्या अचानक बढ़ी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मानसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ तपस कहते हैं वायरस का जो डर है युवाओं के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है कि आगे उनकी नौकरी रहेगी या नहीं, वायरस से संक्रमित हो गए तो परिवार का क्या होगा। इसकी वजह से युवा साइको सोमेटिक के मरीज बनते जा रहे है। ऐसे लोग मेडिसिन विभाग में इलाज के लिए आ रहे है। बताया कि साइको सोमेटिक में युवाओं को एंग्जायटी, नींद का न आना, अचानक हार्ट अटैक, सांस की परेशानी, इम्युनिटी सिस्टम को कमजोर कर देती है। इसकी वजह से खतरा ज्यादा है। अगर यही सिलसिला चलता रहा, तो युवाओं में बुजुर्गों से ज्यादा खतरा है।