इस दौरान पुलिस को पता चला कि इनके साथी बाहर खड़े हैं, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही सभी एक लग्जरी कार को छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने को भी सीज कर दिया। बीआरडी में चालकों और माफिया के बार-बार पुलिस के हत्थे न चढ़ने को लेकर तमाम चर्चाएं रहीं।
एसपी (नार्थ ) मनोज अवस्थी ने कहा कि प्राइवेट एंबुलेंस समेत चार वाहनों को सीज कर दिया गया है। फरार पांच लोगों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी। आरोपियों पर इनाम भी जल्द घोषित होगा।
एंबुलेंस-मरीज माफिया सरकारी से प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को शिफ्ट करते हैं और फिर फर्जी अस्पताल में मरीज अपनी जान गंवा देते हैं। पुलिस जांच में खुली इस पोल को कमिश्नर अनिल ढींगरा ने भी गंभीरता से लिया। 19 जुलाई को पुलिस, आरटीओ, सीएमओ, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ बैठक में सभी विभागों की जिम्मेदारी तय की गई। लेकिन, कमिश्नर के आदेश को विभागों ने गंभीरता से लिया ही नहीं। आरटीओ ने तीन दिन अभियान चलाया और यातायात जागरूकता पखवाड़े का हवाला देकर बंद कर दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अभियान का भी यही हाल है। 187 में महज 30 अस्पतालों का आवेदन निरस्त किया गया है। सीएमओ का कहना है कि अस्पताल अवैध नहीं बल्कि आवेदन में चूक हो गई। उनका यह तर्क गले नहीं उतरता है। अगर सब कुछ ठीक है तो फिर आए दिन प्राइवेट अस्पताल में मरीज की मौत के बाद बिना डिग्री वाले डॉक्टर कैसे सामने आ जाते हैं। अभी जुलाई में ही फर्जी डॉक्टर काजू के इलाज से एक मरीज की जान चली गई थी।
जानकारी के मुताबिक, कमिश्नर ने मेडिकल कॉलेज में सीसी टीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। जगह तलाशी गई, लेकिन आगे बात नहीं बन सकी। कुछ यही हाल प्राइवेट एंबुलेंस पर अस्पताल के नाम व नंबर लिखने का भी है। एंबुलेंस पर नाम, नंबर लिखने का काम भी नहीं हो सका है। सिर्फ कमिश्नर के आदेश के बाद चंद दिन विभागों ने अभियान चलाया और फिर खानापूरी कर बंद कर दिया गया।
तीन दिन का विशेष अभियान चलाकर सात प्राइवेट एंबुलेंस पर कार्रवाई की गई थी। कुछ एंबुलेंस वाले फिटनेस के लिए भी आए हैं। लेकिन, कई अब भी फरार हैं। जागरूकता पखवाड़ा की वजह से अभियान रुका था, अब फिर से चलाया जाएगा। -विजय किशोर आनंद, यात्री कर अधिकारी।
187 प्राइवेट अस्पताल, पैथॉलाॅजी के कागजात में खामी थी। इसमें से 30 के आवेदन को निरस्त कर दिया गया। कई लोगों ने दो बार आवेदन कर दिया था। कोई अवैध नहीं है, सिर्फ आवेदन में ही खामी सामने आई है। सबको एक मौका दिया गया है, ताकि वह कागजात सही करा लें। ऐसा नहीं किया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. आशुतोष दुबे, सीएमओ।