गोरखपुर के निवासी अभिषेक पाठक बताते हैं कि मेरा पूरा परिवार मां वैष्णों का भक्त है। सुख हो या दुख। माता के दरबार में लगभग हर साल सभी सदस्य माथा टेकने जाते हैं। पिछले साल, सात दिसंबर को मैं शादी के बंधन में बंधा। खुशी के इस मौके पर सभी सदस्यों ने यह तय किया कि पत्नी पूजा के साथ मैं, पहली यात्रा वैष्णों मां के दरबार की करूं।
योजना बनी और तारामंडल रोड स्थित घर से हम सड़क मार्ग से ही लखनऊ, आगरा, दिल्ली, चंडीगढ़, पठानकोट, जम्मू होते हुए अगले दिन कटरा पहुंचे। धूप-छांव भरे मौसम में चढ़ाई करते हुए भोर में मां वैष्णों के दरबार में पहुंचे।
दर्शन-पूजन किया और शाम तक वापस कटरा लौट आए। थकान की वजह से हमने आगे की यात्रा अगले दिन शुरू करने का निर्णय किया। सुबह ठंडी हवाओं और पहाड़ों के बीच से घुमावदार सड़कों से होते हुए कश्मीर की तरफ हम बढ़ चले।
हरियाली और बर्फ से पटे पहाड़ों की खूबसूरती देखते बन रही थी। हवा इतनी साफ की हृदय तक उसका आना-जाना साफ महसूस हो रहा था। पूरे दिन चलने के बाद बाद श्रीनगर डल झील के पास पहुंचे। होटल पहले से बुक था। रात गुजारने के बाद हमने गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम समेत सभी पर्यटन स्थलों पर एक-एक कर दस्तक दी। बर्फ से लदे पहाड़ और चारों तरफ का शांत वातावरण दिल को छू गया।
साथ ही यह भी साफ हो गया कि क्यों कश्मीर को धरती का जन्नत बोलते हैं। वहां से लौटते वक्त हम दिल्ली से नैनीताल पहुंचे। वहां का मशहूर ताल घूमने के बाद अन्य पर्यटन वाली जगहों के बारे में जानकारी जुटाई और वहां भी गए। जिम कार्बेट पार्क का भी लुत्फ उठाया। आठ-दस दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। पूरी यात्रा, हमारी सुनहरी यादों का हिस्सा बन गई।