गोरखपुर पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं ने ली नारी गरिमा की सपथ।
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अमर उजाला महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स’ मुहिम चला रहा है। इसी के तहत बुुधवार को गोरखपुर पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों को ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के साथ ही नारी गरिमा के सम्मान की शपथ दिलाई गई। वक्ताओं ने कहा कि बेटा और बेटी में फर्क की मानसिकता बदल जाए तो हर नारी अपराजिता हो सकती है।
सोशल डिस्टेंसिंग रखकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने बेटियों को भी बेटों के समान अवसर दिलाने का संकल्प लिया। साथ ही अपने परिवार, रिश्तेदार और जानने वालों को इसके प्रति जागरूक करने का वादा किया। स्कूल के सेक्रेटरी अरविंद विक्रम चौधरी ने कहा कि महिलाएं अब केवल घर के चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं रह गई हैं।
उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर हर क्षेत्र में अपनी चमक बिखेरी है। जो यह बताने के लिए काफी है कि किसी की मेधा का अंदाजा उसके जेंडर से नहीं बल्कि उसकी प्रतिभा से लगाया जाना चाहिए। समय बदल रहा है, पहले घर चलाने का पूरा दारोमदार पुरुष पर होता था, मगर अब महिलाएं भी नौकरी कर घर चलाने में सहयोग कर रही हैं। यही वजह है कि शादी के लिए शिक्षित बहुओं की तलाश हो रही है।
इनका रहा विशेष सहयोग
डायरेक्टर चारू चौधरी ने कहा कि नारी को अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए आत्मविश्वास का होना जरूरी है। बेटियां एक नहीं दो-दो घरों को रोशन करती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाते हुए उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। शिक्षिका पूजा मिश्रा ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति तभी बदलेगी, जब वे आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी। इसके लिए स्वरोजगार पर भी ध्यान देना होगा। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने पर सभी को जोर देना होगा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में गोरखपुर पब्लिक स्कूल परिवार से शिक्षिका प्रिया श्रीवास्तव, अंजली श्रीवास्तव, नूतन बाला त्रिपाठी, सुनीता त्रिपाठी, अनुपमा श्रीवास्तव, नूरिन वारिस खान और आरआर श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई।
कुछ इस तरह अपराजिताओं ने रखी प्रतिक्रिया
बेहतर प्रयास, ऐसे कार्यक्रम होते रहें
कक्षा 11वीं की नीशू यादव ने बताया कि बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का होते रहना जरूरी है। अपराजिता अभियान बेटियों के लिए काफी मददगार होगा। समाज में बदलाव लाने के लिए यह बेहतर प्रयास है।
महिलाओं को अधिकारों की मिली जानकारी
कक्षा 12वीं की वंशिका श्रीवास्तव ने बताया कि अपराजिता के तहत बेटियों से जुड़ी तमाम ज्ञानपरक जानकारियां मिलीं। इससे भविष्य में काफी फायदा होगा। सफल होने के लिए आवश्यक सुझाव भी मिले हैं। आगे भी ऐसे आयोजनों का होते रहना जरूरी है।
मेधा के आधार पर मिले तवज्जो
कक्षा 10वीं की वंशिका चौबे ने बताया कि बेटियों को समुचित प्रोत्साहन मिलता है तो वे भी आगे बढ़ती हैं। लेकिन समाज में अभी और बदलाव की जरूरत है। इसकी शुरुआत घर से करनी होगी। मेधा के आधार पर बेटे या बेटी को वरीयता मिलनी चाहिए।
शिक्षित समाज से होगा बदलाव
कक्षा 12वीं की प्रीति सिंह ने बताया कि समाज में महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है लेकिन अब भी और प्रयास की जरूरत है। इस दिशा में सभी को मिलकर कदम आगे बढ़ाना होगा। बेहतर शिक्षा और जागरूकता से ही बदलाव होगा।