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कोरोनावायरस पर अलर्ट, सभी डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त, 24 घंटे होगी निगरानी

Mon, 09 Mar 2020 04:22 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।

सार

  • 70 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर मर जाते हैं कोरोना वायरस
  • सोशल मीडिया के अफवाहों से बचने की विशेषज्ञ ने दी सलाह
  • सोर्स वायरस से मिलता जुलता है कोरोना वायरस
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मास्क लगाकर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कोरोनावायरस को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने सभी डॉक्टरों की छुट्टी निरस्त करते हुए सीएचसी और पीएचसी पर 24 घंटे बने रहने को कहा है। रैपिड रिस्पांस की टीम भी 24 घंटे लोगों की सेहत पर नजर रखेगी। राहत वाली बात यह है कि जिले में अभी कोरोनावायरस का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन स्वास्थ्य महकमा सतर्कता बरत रहा है।

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जिला अस्पताल में छह बेड का आईसोलेशन वार्ड बनकर तैयार है। साथ ही अलग से 18 बेड भी बनाए गए हैं। इसके अलावा विदेश से आएं लोगों की निगरानी के लिए 24 घंटे रैपिड रिस्पांस टीम मॉनिटरिंग कर रही है। इसमें एक फिजिशियन, एक महामारी रोग विशेषज्ञ, एक पैथालॉजिस्ट और एक फार्मासिस्ट शामिल है।

सीएमओ ने बताया कि रिस्पांस टीम को यह सूचना मिलती है कि कोई भी व्यक्ति सर्दी-जुकाम से ज्यादा पीड़ित है तो टीम मौके पर पहुंचकर उसकी जांच करेगी। जरा भी संदिग्ध होने पर ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। इसके अलावा विदेश से आए 58 लोगों पर स्वास्थ्य महकमा नजर रखे हुए है।
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होली पर लगाई गई डॉक्टरों की स्पेशल ड्यूटी
होली को देखते हुए जिला अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। तीन आई सर्जन की तैनाती करते हुए एक चर्म रोग विशेषज्ञ सोमवार की रात आठ बजे से लेकर 11 मार्च की सुबह आठ बजे तक अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी करेंगे। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि इसके अलावा हड्डी रोग के दो विशेषज्ञ डॉक्टर भी मौजूद रहेंगे।

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सोशल मीडिया की अफवाहों से बचने की विशेषज्ञ ने दी सलाह

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि 70 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर कोरोनावायरस मर जाता है। सोशल मीडिया पर कई अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इनमें यह भी है कि गर्मी आते ही कोरोनावायरस का संक्रमण कम हो जाएगा। शरीर का तापमान सामान्य इंसान का अधिकतम 37 डिग्री या 98.6 फैरेनहाइट होता है जबकि कोरोनावायरस 45-50 डिग्री पर इनएक्टिव होता है। कोरोनावायरस 70 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर ही मर सकते हैं।

बताया कि सार्स कोरोना और कोरोनावायरस 87 प्रतिशत मिलते-जुलते हैं। 13 प्रतिशत ही वायरस की संरचनाओं में भिन्नता होती है। इसकी वजह से सार्स कोरोना की दवा ग्लाइकोसिलेशन इन्हिबिटर्स कोरोनावायरस के मरीजों पर असर नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में बचाव का एक ही उपाय है कि लोग अपने आसपास सफाई रखें। सेनिटाइजर और मास्क का उपयोग न भी करें तो चलेगा। जरूरत है हाथों को साफ और सूखा रखने की।

देश में कोरोनावायरस की पुष्टि के बाद अचानक सोशल मीडिया पर लोग कोरोना से बचाव के तरीके ढूंढने लगे हैं। इन सबके बीच डॉक्टर लोगों को वायरस से बचने के लिए जागरूक होने की बात कह रहे हैं। डॉक्टरों का कहना हैं कि कोरोनावायरस 2003 में भी सार्स (सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) के रूप में आ चुका हैं। सार्स वायरस दो लोगों में संक्रमण फैलाता था, जबकि कोरोनावायरस तीन से चार लोगों को संक्रमित कर सकता है। ऐसे में इससे बचने के लिए लोग सोशल मीडिया का सहारा बिल्कुल न लें।

दवा के असर पर हो रहे हैं शोध
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि थाईलैंड में कोरोना वायरस के पीड़ित मरीजों को सार्स वायरस और एचआईवी की दवा मिलाकर दी जा रही है। वह कितनी कारगार है, यह अब तक पता नहीं चल सका है लेकिन इस पर शोध जारी है।

इन बातों का रखें ख्याल
डॉ. सिंह ने बताया कि हाथ न मिलाकर, एक-दूसरे को नमस्कार करें। स्वच्छता का ध्यान दें। छींकते या खांसते समय मुंह पर रुमाल रखें। साबुन व स्वच्छ जल से हाथ साफ करें। सर्दी-जुकाम से पीड़ित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें। भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूरी बना कर रखें। होली का त्योहार है। ऐसे में विशेष सतर्कता बरतें। 
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