गोरखपुर। एम्स के ईएनटी विभाग ने 31 वर्षीय युवक के गले में श्वसन नली और आहार नाल के जुड़े हिस्से को ऑपरेशन से अलग कर दिया है। युवक को को टेकियो-ओसोफेजियल फिस्टुला नाम की बीमारी थी। इस बीमारी में कुछ भी खाने पर खांसी आती है। हाल ही में एक्सीडेंट के चलते उसके गले में संक्रमण हो गया था। वह अब स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि कुछ दिन पहले ईएनटी विभाग में एक मरीज आया, जिसे कुछ भी निगलने पर खांसी आने लगती थी। उसके गर्दन के निचले हिस्से में सूजन हो गया था। वह खांसी के डर से बहुत कम मात्रा में भोजन ले पा रहा था। 31 वर्षीय इस मरीज का करीब तीन महीने पहले एक्सीडेंट भी हुआ था। खाने में असमर्थता के कारण मरीज का वजन 30 किलो कम हो गया था।
उन्होंने बताया कि ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने मरीज की केस स्टडी के लिए एक्स-रे की सलाह दी, जिससे पुष्टि हुई कि चोट के कारण श्वसन नली (ट्रेकिआ) गर्दन के निचले हिस्से में भोजन पाइप (एसोफैगस) से जुड़ गई है। यही कारण है कि मरीज को कुछ भी निगलते समय खांसी हो रही थी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद मरीज का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। ईएनटी विभाग के सर्जनों डॉ. रुचिका अग्रवाल, डॉ. पंखुरी मित्तल और आकांक्षा रावत ने एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. विक्रम वर्धन, डॉ. अंकिता काबी और डॉ. रविशंकर के अलावा डॉ. रवि गुप्ता के सहयोग से सर्जरी की।