गोरखपुर एम्स में मरीजों से उपकरण (इंप्लांट) खरीदवाने और बाहर की दवाओं को लिखने के मामले को सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी नजर गड़ा दी है। इसे गंभीरता से लिया गया है। सीएम कार्यालय से एम्स प्रशासन को कड़ा पत्र जारी कर एक सप्ताह में पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। अब मामला शासन तक पहुंचने के बाद एम्स के जिम्मेदारों की नींद उड़ गई है और मरीजों को फोन कर बयान दर्ज किया जा रहा है। फिलहाल, पूरे प्रकरण की जांच कर रही कमेटी तथ्य जुटा रही है।
जानकारी के मुताबिक, अमर उजाला ने मरीजों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। सिकरीगंज के शुक्लपुर निवासी अशोक शुक्ला से ऑपरेशन के लिए दलाल का नंबर देकर उपकरण खरीदवाने का मामला सामने आया है। पता चला कि मजबूरी में उन्हें नर्सिंग होम जाना पड़ा था, क्योंकि दलालों के माध्यम से उपकरण खरीदवाने के बाद भी उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था।
इसके बाद एम्स में चल रहे खेल की जानकारी हुई तो पता चला कि सिर्फ उपकरण ही नहीं इलाज के लिए आ रहे मरीज दवा के नाम पर भी ठगे जा रहे हैं। डॉक्टर उन्हें जो दवा लिखते हैं, वह अंदर परिसर में मौजूद अमृत फार्मेसी में मिलती ही नहीं। मजबूरन उन्हें बाहर जाकर महंगे दामों पर वदा खरीदना पड़ती है।
मामला उजागर होने के बाद एम्स प्रशासन ने आंतरिक जांच कराई तो उसमें यह मामला खुलकर सामने आया। खुद एम्स प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कई बदलाव कर दिए। ऑपरेशन की सूची रोजाना जारी करने और उपकरण निर्धारित जगह से खरीदने का आदेश जारी कर दिया गया। साथ ही कुछ लोगों की ड्यूटी तय कर दी गई, जो रोजाना खरीदे गए उपकरण के रशीद का सत्यापन भी करेंगे। अब इस पूरे मामले का संज्ञान शासन ने ले लिया है। जांच कर शासन की ओर से रिपोर्ट मांगी गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र मिला है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच कर रिपोर्ट भेजी जाएगी। एम्स प्रशासन की पूरी कोशिश है कि किसी भी मरीज को कोई असुविधा न होने पाए। इसका ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए कई आंतरिक आदेश भी दिए गए हैं।
- पंकज श्रीवास्तव, एम्स मीडिया प्रभारी