फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एम्स : पीएपी पीड़ित मरीज के दोनों फेफड़े साफ किए गए

विज्ञापन
विज्ञापन
- एम्स गोरखपुर में पहली बार फेफड़े की दुर्लभ बीमारी का किया गया उपचार
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। एम्स ने एक बार फिर बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की टीम ने सेकेंडरी पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस (पीएपी) से पीड़ित एक मरीज के दोनों फेफड़ों की सफाई सफलतापूर्वक की। यह दो चरणों में एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से हुई।
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि पीएपी में फेफड़ों में सर्फेक्टेंट (प्रोटीन) का अत्यधिक जमाव होने से सांस लेने में कठिनाई होती है। पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस फेफड़ों की एक रेयर बीमारी है, जिसमें सर्फेक्टेंट की क्लीयरेंस कम होने के कारण फेफड़े सर्फेक्टेंट से भर जाते हैं। मरीज कई महीनों से सांस लेने में तकलीफ की हिस्ट्री के साथ आया था, जो कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे और गंभीर हो गई थी।
विज्ञापन

मरीज को रेस्पिरेटरी आईसीयू में भर्ती कराया गया, और उसे लगभग 100 प्रतिशत ऑक्सीजन के साथ बाई पैप सपोर्ट पर रखा गया था। ब्रोंकोस्कोपी की गई और पैथोलॉजी की रिपोर्ट्स में पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस संभावना प्रबल पाई गई। इसका एकमात्र प्रभावी इलाज फेफड़ों की सफाई (लैवेज) है। जो हर फेफड़े के लिए लगभग तीन से चार घंटे तक चलता है। प्रक्रिया (छह दिन के अंतराल पर दो चरणों में किया गया) के बाद मरीज में काफी सुधार हुआ और मरीज को वेंटिलेटर से हटाने में सफलता मिल गई। मरीज में क्लिनिकल और रेडियोलॉजिकल सुधार हुआ।
विज्ञापन

प्रक्रिया के दौरान पल्मोनरी मेडिसिन विभाग से प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देवेश प्रताप सिंह एवं सीनियर रेजिडेंट डॉ. कनुप्रिया, डॉ. हर्ष, डॉ. राघवेंद्रन, डॉ. दर्शी और डॉ. चाहत मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें