मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे पर आते ही गोरखपुर जिले के अफसर भी एक्शन में नजर आ रहे हैं। कोविड अस्पताल और बेड बढ़ाने की कवायद तेजी से चल रही है। एंबुलेंस का किराया भी तय कर दिया गया। मुख्यमंत्री के दौरे और उसके बाद कोविड पीड़ितों को लेकर तमाम फैसलों की खबरें, ज्योंही सोशल मीडिया पर आईं, लोगों की तीखी प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गईं।
शहरवासियों का कहना था कि अधिकारी यह काम पहले भी कर सकते थे। एंबुलेंस चालकों की मनमानी व मरीजों को अस्पताल में जगह न मिलने की ढेरों शिकायतें मिल रहीं थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गोरखपुर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा है। आठ हजार से ज्यादा सक्रिय मरीज हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और टीबी अस्पताल सहित ज्यादातर निजी अस्पतालों में बेड भरे हैं। जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम है, उन्हें भी अस्पताल में जगह नहीं मिल पा रही है।
जिस स्पोर्ट्स कॉलेज में अब कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है, वहां कोरोना की पहली लहर के दौरान अस्थायी हॉस्पिटल बनाया गया था। 150 मरीज भर्ती किए जा रहे थे, लेकिन इस बार अस्थायी हॉस्पिटल भी नहीं बनाया गया। इसका मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया और सक्रियता दिखाई तो काम में तेजी आई है।
यही हाल एम्स गोरखपुर का है। अगर प्रशासनिक अधिकारी चाह लेते तो एम्स में कोविड अस्पताल कब का बन सकता था। एम्स के पास बेड है। सुविधा-संसाधन भी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सहारा इस्टेट क्लब व हॉस्टल को पहले भी कोविड अस्पताल बनाया जा सकता था।
अगर ऐसा होता तो तमाम कोरोना संक्रमितों व उनके तीमारदारों को भटकना नहीं पड़ता। बड़हलगंज के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर ही कोविड अस्पताल बन रहा है। ऑक्सीजन की पाइप लाइन बिछायी जा रही है।