गोरखपुर के तारामंडल में अधिवक्ता और डॉक्टर रे के बीच छोटी सी जमीन को लेकर शुरू हुई लड़ाई अब शहर में चर्चा का विषय बनी है। बार-बार हुई पैमाइश, सुलझने की बजाय मामला उलझता गया।
गोरखपुर के तारामंडल इलाके में एक छोटी से जमीन के हिस्से की पैमाइश का विवाद इस कदर बढ़ गया कि लड़ाई नाक की बन गई। एक अधिवक्ता और डॉक्टर के बीच शुरू हुई लड़ाई में आईएमए भी कूद चुका है। जीडीए और प्रशासन के आला अधिकारी भी इसको सुलझाने में लगे रहे। लेकिन, विवाद सुलझने के बजाय बढ़ता ही गया।
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नौबत यह आई कि जमीन से शुरू हुआ विवाद अस्पताल के सील होने तक पहुंच गया। दरअसल, पिछले दिनों जीडीए ने डॉक्टर संतोष शंकर रे के दाउपुर स्थित अस्पताल को सील कर दिया। बताया गया कि नक्शा आवास का था और उपयोग व्यावसायिक हो रहा है। लेकिन डॉक्टरों में चर्चा है कि इस मामले की असली जड़ तारामंडल के सिद्धार्थ इन्क्लेव विस्तार आवासीय योजना के तहत डॉक्टर संतोष शंकर रे की एक जमीन है।
दरअसल उसी जमीन के बगल में एक अधिवक्ता की भी जमीन है। दोनों जमीन जीडीए की है। अधिवक्ता ने जमीन कम होने का हवाला देकर पैमाइश का आदेश करा लिया। पैमाइश हुई तो डॉक्टर की जमीन में दो फीट विनोद की जमीन मिली। इसके बाद डॉक्टर ने पैमाइश कराई। इंजीनियरों की एक टीम बनी और नापजोख के बाद दो फीट की जगह एक फीट जमीन मिली।
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फिर पैमाइश ही चलती रही। जानकारों के मुताबिक जमीन की 10 बार पैमाइश हो चुकी है। इसी बीच अधिवक्ता ने आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दे दी कि डॉक्टर की पत्नी ने कुछ दबंगों को भेजकर उनकी बाउंड्री गिरवा दी।
विनोद सिंह की पत्नी की तहरीर पर डॉ. संतोष शंकर रे, उनकी पत्नी और 20 अज्ञात लोगों पर मारपीट सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। केस दर्ज होने के बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहा। लेकिन, इस बीच जीडीए ने डॉ संतोष शंकर रे को आवासीय मानचित्र स्वीकृत कराकर अस्पताल संचालन के लिए नोटिस दे दिया। नोटिस का जवाब न मिलने पर मंगलवार को जीडीए की टीम द्वारा अस्पताल को सील कर दिया गया।
सील खुलवाने के लिए तारीख पर तारीख
डाॅक्टर के अस्पताल की सील खुलवाने के लिए आईएमए के सदस्यों ने जीडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि 24 घंटे के अंदर सील खुल जाएगी, लेकिन 72 घंटे से अधिक समय बीत चुके हैं, अब तक सील नहीं खुली है। जबकि, तीन से चार बार जीडीए की टीम अस्पताल जाकर पैमाइश कर चुकी है।
2002 में जमीन का आवंटन लिया था। 2007 में जीडीए से जमीन का बैनामा कराया। बनवाने के लिए जीडीए से नक्शा पास करवाया। मेरे जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है। जीडीए के द्वारा पैमाइश भी कराया जा चुका है। इसके बाद भी दूसरा पक्ष विवाद करने में जुटा हुआ है। जबकि, नियम के तहत पैमाइश हुई है। -विनोद कुमार सिंह, अधिवक्ता
तारामंडल में जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसी विवाद का परिणाम है कि अस्पताल को भी सील करा दिया गया। जबकि, बात सिर्फ पैमाइश की ही है। अगर सही तरीके से पैमाइश हो जाए तो यह विवाद खत्म हो जाएगा। लेकिन, नियम के तहत पैमाइश नहीं हो रही है।-डॉ. संतोष शंकर रे
आवासीय मानचित्र स्वीकृत कराकर बनाया गया भवन में अस्पताल संचालित हो रहा था। शिकायत के आधार पर जांच की गई तो आरोपी सही पाया गया। उसी के आधार पर अस्पताल को सील किया गया है। रही बात जमीन विवाद की तो इसमें जीडीए का काेई लेना-देना नहीं है। -उदय प्रताप सिंह, सचिव