सहालग शुरू होते ही पनीर की खपत बढ़ गई है लेकिन जो पनीर आप खा रहे हैं उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। मिल्क पाउडर, रिफाइंड व अन्य केमिकल से धंधेबाज कृत्रिम पनीर बना रहे हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। खजनी इलाका मिलावटी पनीर के धंधे का केंद्र बन गया है।
यहां 50 से ज्यादा दूधिए रात में मिलावटी पनीर तैयार करते हैं और सुबह बाइक पर कंटेनर में रखकर रेस्टोरेंट-होटल और दुकानों तक पहुंचाते हैं। इस इलाके में सहालग में रोजाना करीब 500 क्विंटल मिलावटी पनीर तैयार हो रहा है, गोरखपुर के अलावा खलीलाबाद में खपाया जा रहा है।
सबसे ज्यादा मिलावटी पनीर भैंसा बाजार और महदेवा बाजार में तैयार होता है। यहां के ग्वाले रात के अंधेरे में पनीर तैयार करते हैं। थोक में 150 रुपये किलो पनीर बेचते हैं, यही पनीर बाजार में 250-300 रुपये तक बिक जाता है। जानकारों के मुताबिक, इन गांवों के अधिकतर घरों में सस्ते मिल्क पाउडर, अरारोट और कैल्शियम क्लोराइड से पनीर तैयार किया जा रहा है।
पनीर के एक कारोबारी ने बताया कि महदेवा बाजार में रोजाना 150 से 200 क्विंटल, भैंसा बाजार में 200 क्विंटल, पिपरागंगा में करीब 100 और दुघरा व सतुआभार में रोजाना 150 क्विंटल से ज्यादा पनीर तैयार किया जा रहा है। सुबह ही 40 से ज्यादा दूधिए और एजेंट बाइक पर कंटेनर में पनीर रखकर ले जाते हैं।
ऐसे करें असली और मिलावटी पनीर की पहचान
असली और मिलावटी पनीर की पहचान करने के लिए पनीर का एक टुकड़ा लें और उसे मसलें। अगर पनीर टूटकर बिखरने लगे तो समझ जाएं कि मिलावटी है।
असली पनीर मुलायम होता है जबकि मिलावटी पनीर थोड़ा सख्त होता है।
खाते समय अगर पनीर रबर की तरह खिंच रहा हो तो समझ जाएं की मिलावटी है।
असली और नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर
सकते हैं। पहले पनीर को पानी में उबाल लें और ठंडा हो जाने पर उसमें अरहर या सोयाबीन का पाउडर डालकर देखें। अगर पनीर काला पड़ जाए तो वह मिलावटी है।
पनीर का टुकड़ा सामान्य पानी में डालकर हिलाएं। अगर इसमें डिटर्जेंट मिला होगा तो झाग बनने लगेगा।
पनीर को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। अगर यह मुलायम है तो मिलावटी या नकली हो सकता है। असली पनीर सख्त हो जाता है।