गोरखपुर विश्वविद्यालय में द्वितीय श्रेेणी से कम के अंक पर शोध में हुए प्रवेश निरस्त
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्नातक में द्वितीय श्रेणी (45 प्रतिशत) से कम अंक होने पर ही पीएचडी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया है। ऐसे अभ्यर्थियों के प्रवेश के लिए अनुशंसा करनेवाले लोगों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सत्र 2019-20 में पीएचडी में स्नातक में तृतीय स्थान पाने वाले विद्यार्थियों का भी प्रवेश ले लिया गया था। इस मसले पर पिछले वर्ष जनवरी में जमकर हंगामा हुआ था। विद्यार्थियों ने भेदभाव और नियमों की अनदेखी कर प्रवेश लेने की शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से की थी। इसपर कुलपति की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय संकायाध्यक्ष सलाहकार समिति गठित कर दी गई।
15 जनवरी को कुलपति प्रो. राजेश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि स्नातक में द्वितीय श्रेणी से कम अंक पर प्रवेश शोध अध्यादेश-2018 का उल्लंघन किया गया है। इसलिए ऐसे सभी प्रवेश निरस्त किए जाते हैं।
कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। जिसमें यह भी कहा गया है कि जिन विद्यार्थियों के पास शोध अध्यादेश-2018 के अनुसार न्यूनतम अर्हता नहीं है, उनका प्रवेश किसी दशा में न लिया जाए।
दस से ज्यादा हुए हैं प्रवेश
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2019-20 में स्नातक में द्वितीय श्रेणी से कम अंक पाने वाले करीब दस से ज्यादा प्रवेश लिए गए हैं। राजनीति विज्ञान, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, गणित, जीव विज्ञान में ये प्रवेश हुए हैं। इनमें से कुछ छात्रों ने पीएचडी की कक्षाएं भी की हैं।