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खुटहन के 240 एकड़ जमीन मामले में काउंटर दाखिल करेगा प्रशासन, वन विभाग के नाम चढ़ चुकी है जमीन

Thu, 13 Feb 2020 09:23 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया।
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खुटहन के 240 एकड़ जमीन के मामले में जिला प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में काउंटर एफिडेविट (प्रतिशपथ पत्र) दाखिल करेगा। इसके लिए एडीएम (सिटी) राकेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार की शाम या शुक्रवार को दिल्ली रवाना होगी। टीम वहां रहकर काउंटर एफिडेविट के जरिए अपना पक्ष रखेगी। यह जमीन वन विभाग के नाम चढ़ चुकी है, लेकिन सेठ रमन दास इसे अपना बताते हैं।

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 जानकारी के मुताबिक, करीब चार दशक पहले विभाग ने खुटहन में अपनी छूटी हुई जमीनों को लेकर गजट निकाला था। प्रक्रिया के बाद सरकारी दस्तावेजों में जमीन वन विभाग के नाम कर दी गई। लंबे समय बाद सेठ रमन दास ने इस जमीन पर दावा करते हुए अपना बताया। मामला वन विभाग से लेक र चकबंदी होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचा मगर हर जगह रमन दास को हार ही मिली।

इसपर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद को इस जमीन का भूमिधर बताया। डीएम के निर्देश पर इसी मामले में टीम अपना प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने सुप्रीम कोर्ट जाएगी। टीम के बाकी दो सदस्यों में सीआरओ चंद्रशेखर मिश्रा और डीएफओ बीसी ब्रह्मा शामिल हैं।

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एम्स की जमीन आवंटन के समय से गरमाया मामला

सदर तहसील के खुटहन की इस कीमती जमीन का मामला एम्स की जमीन के आवंटन के समय गरमाया। एम्स निर्माण के लिए महादेव झारखंडी स्थित गन्ना शोध केंद्र की जमीन पर मुहर लगने के पहले, वन विभाग की खुटहन की ही 240 एकड़ जमीन का नाम आया था। एम्स के लिए सपा शासन ने सबसे पहले इसी जमीन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। तभी रमन दास भी ज्यादा सक्रिय हुए। मगर प्रशासन से लेकर हाईकोर्ट तक ने उनके दावे को खारिज कर दिया।

डीएफओ बीसी ब्रह्मा ने कहा कि खुटहन में 240 एकड़ जमीन के मामले में प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के लिए टीम सुप्रीम कोर्ट जाएगी। 26 फरवरी को इस मामले में सुनवाई है। सेठ रमन दास इस जमीन पर भूमिधर बता रहे हैं।

एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि खुटहन की 240 एकड़ जमीन पर सेठ रमन दास अपना दावा कर रहे हैं। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए दिल्ली जाना है।

ज्योति रमन दास ने कहा कि 1976 के आस-पास वन विभाग ने गजट निकालकर मेरी जमीन कब्जा कर ली। खतौनी पर विभाग का नाम भी चढ़ गया। मुझे जानकारी नहीं हो पाई थी, जिसकी वजह से मैं आपत्ति नहीं दर्ज करा सका। चकबंदी और हाईकोर्ट से मुझे हार मिली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दे रखा है। प्रशासन और वन विभाग जबरन मेरी जमीन छीन रहे हैं।

 
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