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Gorakhpur News: बर्न वार्ड में अतिरिक्त बेड, इमरजेंसी में बढ़ाए गए डॉक्टर

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प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से ली स्वास्थ्य विभाग के तैयारियों की जानकारी
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सीएमओ ने बताया आपात स्थिति के लिए तैयार है स्वास्थ्य विभाग

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दिवाली से छठ तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए आपातकालीन बेड, दवाएं और डॉक्टरों का इंतजाम करने के निर्देश प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य ने दिए हैं। सीएमओ ने इस निर्देश के अनुसार मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सभी सीएचसी-पीएचसी में अतिरिक्त बेड लगवाने, सीएचसी पर एम्बुलेंस उपलब्ध रखने के निर्देश जारी किए हैं।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि त्योहार को ध्यान में रखते हुए बर्न वार्ड समेत हर जगह अतिरिक्त व्यवस्था करनी है। जिला अस्पताल में 20 बेड और सभी सीएचसी में 4-4 बेड आरक्षित किए गए हैं। बर्न केस के लिए अस्पतालों में डॉक्टर और दवाएं 24 घंटे उपलब्ध रखनी हैं। इमरजेंसी सेवा को 24 घंटे चालू रखना है। इमरजेंसी सेवा के लिए फिजिशियन, सर्जन की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जाएगी। अन्य डॉक्टर भी ऑन कॉल मौजूद रहेंगे।
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मेडिकल कॉलेज के एसआईसी डॉ. राजेश कुमार राय ने बताया कि त्योहार के मद्देनजर ट्रामा एवं इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है। आग से जलने के मामलों में इलाज के लिए सभी जरूरी दवाएं इमरजेंसी वार्ड में उपलब्ध कराई गई हैं। दिवाली में आग से ही नहीं बल्कि फूड प्वाइजनिंग, पेट दर्द, शुगर, ब्लड प्रेशर आदि के भी मामले सामने आते हैं। इसलिए फिजिशियन की ड्यूटी भी बढ़ाई गई है।

जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में छह बेड हैं, इसके अलावा पांच बेड अतिरिक्त रखा गया है। डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगाई गई है। जिला अस्पताल के नोडल अधिकारी प्रशासन डॉ. प्रशांत अस्थाना ने बताया कि आग से जले मरीजों के इलाज के लिए सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
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एम्स : इमरजेंसी में भर्ती नहीं किए जाते बर्न केस

गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की इमरजेंसी में अभी बर्न केस नहीं लिए जाते। वजह, अभी यहां न तो गंभीर मरीजों के लिए क्रिटिकल केयर यूनिट है और न ही ब्लड बैंक। एम्स के इमरजेंसी वार्ड में अभी केवल 30 बेड हैं। अत्यंत गंभीर मरीजों के तत्काल उपचार के लिए जरूरी उपकरण भी नहीं हैं। इसके चलते गंभीर मरीज आने पर अक्सर ही कहासुनी हो जाती है। ब्यूरो
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दिवाली में ये रखें सावधानियां

घर में पटाखे न जलाएं, आतिशबाजी खुले स्थान पर करें।
अधजले पटाखे को दोबारा आग न लगाएं, उस पर पानी डाल दें।
बच्चों के पटाखा जलाते समय बड़े साथ में रहें।

धातु या शीशे की वस्तु में रखकर पटाखा न जलाएं।

पटाखा जलाते समय पानी की बाल्टी पास में रखें।

आतिशबाजी के समय देख लें कि आस-पास ज्वलनशील सामग्री तो नहीं है।
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डॉक्टर की सलाह
पटाखे से जलने पर तुरंत उस जगह ठंडा पानी डालें

जले हुए स्थान पर मक्खन, पाउडर आदि न डालें, इससे संक्रमण का खतरा रहता है।

तेज रोशनी वाली आतिशबाजी चलाने पर चश्मा पहनें।
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