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कोरोना मरीज को भर्ती कर बड़ी रकम वसूलने का आरोप, पुलिस बुलाई

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कोरोना मरीज को भर्ती कर बड़ी रकम वसूलने का आरोप, पुलिस बुलाई
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गोरखपुर। शहर के तारामंडल स्थित दो निजी अस्पतालों ने पेट दर्द और उल्टी से परेशान बुजुर्ग के इलाज के लिए सात दिन में बड़ी रकम वसूल ली, जब पता चला कि बुजुर्ग को कोरोना हैं, तो अस्पताल से बाहर कर दिया। यह आरोप लगाते हुए परिजनों ने बृहस्पतिवार को मामले की शिकायत डॉयल 112 पर की। पुलिस के पहुंचने के बाद मामला किसी तरह सुलझा और मरीज को इलाज के लिए बीआरडी में भर्ती कराया गया। इस मामले में अभी कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, परिजनों के मुताबिक शुक्रवार को वे लिखित शिकायत करेंगे।
जानकारी के मुताबिक हांसूपुर के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। एक हफ्ते पहले तारामंडल के शिवाय हॉस्पिटल में इलाज के लिए परिजन लेकर गए। इस बीच बगैर आईडी जनरेट किए और जांच की अनुमति बिना ही हॉस्पिटल ने मरीज की रैपिड किट से कोरोना जांच कराई। यह जांच भी एक प्राइवेट पैथोलॉजी ने की। जांच रिपोर्ट निगेटिव आई तो अस्पताल संचालक ने मरीज को आईसीयू में भर्ती कर लिया। आरोप है कि कोरोना प्रोटोकॉल का बिल्कुल पालन नहीं किया गया। सभी मरीजों के साथ बुजुर्ग को आईसीयू में ही रखा गया। हॉस्पिटल के चिकित्सक पांच दिनों तक मरीज का इलाज करते रहे, लेकिन मरीज की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस बीच इलाज के नाम पर अस्पताल ने ऑनकॉल डॉक्टर को बुलाया।
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ऑनकॉल कर दूसरे अस्पताल में कराया भर्ती
आरोप है कि मरीज की हालत नहीं सुधरी तो शिवाय हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने तारामंडल के पैरामाउंट हॉस्पिटल के एक डॉक्टर को ऑनकाल बुलाया। इसके बाद डॉक्टर ने उसे अपने अस्पताल में शिफ्ट करा दिया। पैरामाउंट में दो दिन तक मरीज भर्ती रहा। मरीज के इलाज के नाम पर बिल बनाएं बगैर ही रकम की मांग की गई।
संक्रमित होने का पता चला तो डॉक्टरों ने कहा ले जाइए
इस बीच पैरामाउंट हॉस्पिटल ने कोरोना के लक्षण देखने पर निजी लैब में जांच के लिए नमूना भेजा। बृहस्पतिवार को मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद से डॉक्टरों के हाथ पांव फूल गए। डॉक्टरों ने परिजनों से मरीज को ले जाने को कहा। इस पर परिजन नाराज हो गए। परिजनों का आरोप है कि अगर मरीज में कोरोना के लक्षण थे, तो इन्हें सामान्य मरीजों की तरह क्यों भर्ती किया गया। इनका वार्ड अलग होना चाहिए था।
बिना लिखित सलाह के करा दी जांच
इस मामले में लगातार लापरवाही का सिलसिला जारी रहा। बताया जाता है कि प्राइवेट पैथोलॉजी को बुजुर्ग की जांच के लिए कोई लिखित परामर्श (प्रिसक्रिप्शन) ही अस्पताल के डॉक्टर ने नहीं दिया था। जबकि, परिजनों का आरोप है कि से इसके लिए उनसे 4500 रुपये लिए गए। बिना परामर्श के सैंपल पैथोलॉजी को भेजा गया। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो पैथोलॉजी ने प्रिसक्रिप्शन के बगैर रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। इसकी जानकारी पैथोलॉजी के कर्मचारियों ने डॉक्टर और मरीज के परिजनों को दी है। इस पर परिजनों ने जब डॉक्टर से संपर्क किया उन्होंने प्रिसक्रिप्शन देने से इन्कार कर दिया।
अस्पताल से बाहर कर दिया मरीज
आरोप है कि कोरोना के संक्रमण का पता चलते ही डॉक्टर ने मरीज को अस्पताल से बाहर करने का फैसला किया। उन्होंने परिजनों को मरीज को दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए कहा। तब परिजनों ने पुलिस से शिकायत की। मौके पर पुलिसकर्मी पहुंचे, जिसके बाद मरीज को बीआरडी मेडिकल कालेज भेजा गया। जहां पर मरीज को कोविड वार्ड में भर्ती कराते हुए इलाज शुरू करा दिया गया है। बुजुर्ग के बेटे ने बताया कि दोनों अस्पतालों ने लापरवाही की है। शुक्रवार को दोनों अस्पतालों के खिलाफ लिखित शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की जाएगी।
चार दिन पहले गंभीर हालत में मरीज को रेफर कर दिया गया था। अपनी सुरक्षा के लिए एंटी जन किट से जांच बुजुर्ग की गई थी। जांच में उस वक्त रिपोर्ट निगेटिव आई थी। बृहस्पतिवार को पता चला कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
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डीके राय, शिवाय हॉस्पिटल, संचालक
मरीज का इलाज किया जा रहा था। इस बीच कोरोना के लक्षण दिखने पर जांच कराई, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। मरीज के परिजनों ने कुछ रुपये भी नहीं दिए। खुद ही हो-हल्ला करने लगे।
- राकेश सिंह, पैरामाउंट हॉस्पिटल, संचालक
मामला गंभीर है। इस मामले में लिखित शिकायत मिलने पर दोनों अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। दोनों पैथोलॉजी की भूमिका की भी जांच होगी।
- डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ
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