एबीवीपी के प्रांत मीडिया संयोजक अनुराग मिश्रा ने संगठन का मत रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ चलाया जा रहा आंदोलन समस्याओं के समाधान तक जारी रहेगा। विवि प्रशासन के तानाशाही रवैये की चपेट में छात्र, शिक्षक और कर्मचारी सब हैं। एबीवीपी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी वर्गो के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेगी।
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एबीवीपी ने विश्वविद्यालय से मांगा है इन सवालों का जवाब
-छह माह में करा ली जाने वाली प्री पीएचडी परीक्षा दो साल बाद क्यों हुई?
- सत्र 2018- 19 के छात्रों का लगभग 4 वर्ष पूरा होने जा रहा है अभी तक एक भी छात्र का शोध प्रबंध जमा क्यों नहीं हुआ?
-शोध जमा करने का शुल्क साढ़े तीन हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपया करना क्या आपके छात्र विरोधी मानसिकता को नहीं दर्शाता है?
-35500 रूपया प्रति सेमेस्टर पार्ट टाइम पीएचडी का शुल्क रखना क्या शोध का व्यापार नहीं है? इतने भारी शुल्क निर्धारण के पीछे का आधार क्या है?
-विश्वविद्यालय को शिक्षा का केंद्र बनाने के बजाय धनादोहन का केंद्र बनाना क्या दीनदयाल जी के विचारों की हत्या नहीं है?
पूरे मामले में बैकफुुट पर दिखी पुलिस
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की सूचना पर विवि चौकी इंचार्ज अमित चौधरी पुलिस बल के साथ मुख्य द्वार पर मौजूद थे। नियंता मंडल के सदस्य पर छात्र हमलावर हुए तो पुलिस आगे बढ़ी लेकिन उग्र रूप देख पीछे हो गई। पुलिस को बैकफुट पर देख नियंता मंडल के सदस्यों ने भी पीछे हो लिए। हाथापाई की सूचना पर कैंट इंस्पेक्टर भी पहुंच गए लेकिन वह भी छात्रों के पास तक नहीं गए।