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Gorakhpur News: पुरानी पेंशन, मानदेय व समान वेतन के मुद्दों पर खूब पड़े वोट

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गोरखपुर। पुरानी पेंशन की बहाली, सम्मानजनक मानदेय और समान कार्य-समान वेतन की मांग को लेकर शुक्रवार को गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन में मतदान के दौरान शिक्षकों ने मतदान किया। सुबह आठ बजे मतदान शुरू होते ही बूथों पर शिक्षकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पहली बार मतदान करने वाले शिक्षकों में खासा उत्साह दिखा।
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नियमित शिक्षक जहां बुढ़ापे के सहारे यानी पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर मुखर रहे, वहीं वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों ने कम मानदेय, अनिश्चित वेतन और सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया। महिला शिक्षकों ने प्रसूति अवकाश, आकस्मिक अवकाश और कैशलेस चिकित्सा जैसी सुविधाओं की मांग भी रखी। शिक्षकों ने ऐसे प्रतिनिधि के चयन के लिए मतदान किया, जो उनकी समस्याओं को सदन में मजबूती से उठा सके।
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पेंशन शिक्षकों के बुढ़ापे की लाठी

- शिक्षकों ने कहा कि जीवनभर शिक्षण कार्य करने के बाद बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है। पुरानी पेंशन बहाली शिक्षकों के भविष्य और सम्मान से जुड़ा सबसे अहम मुद्दा है।
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-डॉ. चारू शीला सिंह
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वित्तविहीन शिक्षकों को मिले सम्मानजनक मानदेय

-वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए। नियमित शिक्षकों की तरह काम करने के बावजूद उन्हें जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं।

- रचना पांडेय
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शिक्षकों की समस्याएं सदन में उठाने वाला प्रतिनिधि चाहिए

- वित्तविहीन शिक्षकों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे प्रतिनिधि के चयन के लिए वोट किया है, जो उनकी बेहतरी को प्राथमिकता दे।

- शैलजा
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शिक्षक खुशहाल होंगे, तभी बेहतर होगा अध्यापन

शिक्षकों की कई समस्याएं शासन तक नहीं पहुंच पातीं। जब तक शिक्षक मानसिक और आर्थिक रूप से खुशहाल नहीं होंगे, तब तक बेहतर अध्यापन की उम्मीद करना मुश्किल है।

- योगेंद्रनाथ पांडेय
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महिला शिक्षकों को भी मिले समान वेतन

- वित्तविहीन विद्यालयों की महिला शिक्षक भी सरकारी शिक्षकों की तरह पूरे दिन काम करती हैं। इसके बावजूद उन्हें समान वेतन और दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं।

- नौशीन
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निजी स्कूलों की महिला शिक्षकों को मिले सुविधाएं

- पहली बार मतदान करने का मौका मिला है। निजी स्कूलों की महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश, आकस्मिक अवकाश, बेहतर वेतन और कैशलेस चिकित्सा की सुविधा मिलनी चाहिए।

- बुशरा रिजवी
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निजी शिक्षकों के लिए बने विशेष नियमावली

- निजी स्कूलों में शिक्षकों की फिक्स सैलरी तक तय नहीं है। अच्छी डिग्री हासिल करने के बाद भी कम वेतन पर काम करना पड़ता है। निजी शिक्षकों के लिए स्पष्ट नियमावली जरूरी है।

- रिमझिम गुप्ता
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कम मानदेय में काम, छुट्टी में भी जिम्मेदारी

निजी स्कूलों में कम मानदेय पर काम करना पड़ता है। विद्यार्थियों की छुट्टी होने के बाद भी शिक्षकों को स्कूल में विभिन्न कार्य करने पड़ते हैं। उनकी समस्याएं सदन में उठनी चाहिए।
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-शिल्पी वर्मा
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