गोरखपुर। सेवानिवृत्त आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. मंजुला श्रीवास्तव (64) को आठ दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ रुपये की जालसाजी के मामले में क्राइम ब्रांच ने वाराणसी के मछली व्यापारी विकास विश्वकर्मा को कैंट क्षेत्र से बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने मछली के व्यापार के लिए खोले गए खाते में ठगी की रकम मंगाई थी। इसके चंद सेकेंडों बाद ही 40 अलग-अलग खातों में रकम को ट्रांसफर कर दिया था।
पूछताछ में पुलिस को आरोपी ने तीन सहयोगियों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस ने बुधवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अब गोरखपुर साइबर पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। पकड़े गए आरोपी की पहचान वाराणसी जिले के चितईपुर थाना क्षेत्र के गणेशपुरी कॉलोनी नासिपुर निवासी विकास विश्वकर्मा के रूप में हुई।
दरअसल, कैंट इलाके में रहने वाली डॉ. मंजुला वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुई हैं। पति के निधन के बाद अकेली रहती हैं। एक बेटे की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा बेटा गुजरात में रहता है। डॉ. मंजुला श्रीवास्तव के व्हाट्सएप पर पास 13 फरवरी को वीडियो कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस और ईडी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है।
जालसाजों ने एक एटीएम कार्ड दिखाकर कहा कि केनरा बैंक खाते से 50 लाख रुपये का लेनदेन संदिग्ध है। गिरफ्तारी और एक साल की जेल की धमकी देकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट रहने को कहा गया। 13 से 21 फरवरी तक जालसाज लगातार फोन पर जुड़े रहे। बैंक जाते समय भी मोबाइल ऑन और चार्जिंग पर रखने को कहा गया। इस दौरान उन्होंने सारी एफडी तुड़वाकर अलग-अलग खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। परिवार को जानकारी देने से भी मना किया गया।
21 फरवरी को बची 30 लाख रुपये की एफडी भी तुड़वाकर ट्रांसफर करा दी गई। 24 फरवरी को जालसाजों ने फर्जी ईडी रसीदें भेजीं और भरोसा दिलाया कि पैसा लीगलाइजेशन के बाद वापस आ जाएगा। जब रकम वापस नहीं आई तो डॉ. मंजुला को ठगी का अहसास हुआ। 26 फरवरी को मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। -
पुलिस ने जारी किया लोकल नंबर
पुलिस की ओर से बताया गया है कि अगर साइबर अपराध हो या फिर शक हो तो तत्काल फोन काट दें। साइबर जालसाजी की सूचना राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 1930, पोर्टल: cybercrime.gov.in पर दे। इसके अलावा गोरखपुर साइबर थाना के सीयूजी 7839876674 से संपर्क करें।
पुलिस ने आठ दिन डिजिटल अरेस्ट रहने वाली पीड़िता की तहरीर पर अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है।
- सुधीर जायसवाल, एसपी क्राइम
शहर में पहले भी आ चुके हैं डिजिटल अरेस्ट के मामले
- 24 मई 2024 : सिविल लाइंस के एक स्कूल की प्रिसिंपल को डिजिटल अरेस्ट करके 12.56 लाख जालसाजी।
- 15 मई 2024 : शहर की एक कंपनी के मैनेजर को डिजिटल अरेस्ट करके 14.96 लाख रुपये जालसाजी।
- 31 जुलाई 2024 : को शाहपुर के हरिद्वारपुर कॉलोनी निवासी सेवानिवृत बैंककर्मी ऑलविन अरविंद बर्नाड से जालसाजी की कोशिश की गई।
- 7 अगस्त 2024 : रामगढ़ताल इलाके में रहने वाले रिटायर हेल्थकर्मी को डिजिटल अरेस्ट करके 30 लाख वसूले गए।
- 8 अगस्त 2024: सिद्धार्थ इंक्लेव निवासी विजयेंद्र कुमार पांडेय को चार दिन डिजिटल अरेस्ट कर 30 लाख की ठगी।
- 29 सितंबर 2024: कैंट इलाके के 80 वर्षीय डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट किया गया, इससे तबीयत बिगड़ी थी
- 11 अगस्त 2025: गोरखनाथ के इंद्रजीत शुक्ला को 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट कर 14 लाख की ठगी।
साइबर ठगी से बचने के उपाय
साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह ने बताया कि यदि किसी अनजान नंबर से काॅल आती है और वह आपको किसी बैंक खाते, मनी लाॅन्ड्रिंग या किसी अन्य अपराध में फंसा होने का दावा करता है तो घबराएं नहीं। तत्काल काॅल कट कर दें। अपने आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी कभी भी फोन, ई-मेल या संदेश के माध्यम से न दें। बैंक या सरकारी एजेंसी कभी फोन पर इन चीजों की मांग नहीं करतीं। यदि कोई दावा करता है कि आपके खिलाफ कोई वारंट जारी किया गया है या आपको किसी अपराध में फंसा लिया गया है तो तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित विभाग से सत्यापन करें। यदि आपको लगता है कि आप धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं तो तुरंत साइबर थाने में रिपोर्ट करें और अपने बैंक से संपर्क करें। साथ ही अगर किसी ने खाते में रुपये ट्रांसफर किए हैं तो तुरंत बैंक को सूचित करें। फिशिंग स्कैम में साइबर अपराधी आपको आकर्षक ऑफर या धमकी भरे संदेश भेजते हैं। ऐसे संदेशों पर क्लिक न करें और संदिग्ध लिंक से दूर रहें।